SEBI का बड़ा फैसला, Gallantt Ispat के प्रमोटरों को मिली राहत, 60% हिस्सेदारी बिना ओपन ऑफर के खरीदने की इजाजत

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SEBI का बड़ा फैसला, Gallantt Ispat के प्रमोटरों को मिली राहत, 60% हिस्सेदारी बिना ओपन ऑफर के खरीदने की इजाजत
Overview

SEBI ने Gallantt Ispat में प्रमोटर ग्रुप की रीस्ट्रक्चरिंग को हरी झंडी दिखा दी है। रेगुलेटर ने Gallantt Trust को कंपनी में **60.05%** हिस्सेदारी खरीदने की इजाजत दे दी है। खास बात यह है कि इसके लिए पब्लिक ओपन ऑफर (Open Offer) नहीं करना पड़ेगा।

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SEBI ने Gallantt Trust को यह विशेष छूट दी है, जिसके तहत वह Gallantt Ispat Limited के 14,48,90,556 इक्विटी शेयर ऑफ-मार्केट (Off-market) ट्रांजेक्शन के जरिए हासिल कर सकेगा। यह शेयर कंपनी की कुल शेयर कैपिटल का 60.051% है। इस छूट के कारण Gallantt Trust को इन शेयरों के लिए पब्लिक ओपन ऑफर (Public Open Offer) जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी।

SEBI ने इस सौदे को एक 'इंटरनल प्रमोटर ग्रुप रीस्ट्रक्चरिंग' करार दिया है, जो मुख्य रूप से उत्तराधिकार (Succession) और पारिवारिक कल्याण (Family Welfare) के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। SEBI का कहना है कि इससे प्रमोटर्स की मौजूदा हिस्सेदारी की संरचना में कोई बदलाव नहीं आएगा। यह आदेश 20 मार्च 2026 को जारी किया गया था, और ट्रांजेक्शन की जानकारी 01 अप्रैल 2026 को दी गई।

इस कदम से प्रमोटर परिवार के भीतर कंपनी पर नियंत्रण और मजबूत होगा। पब्लिक ओपन ऑफर की प्रक्रिया में अक्सर काफी जटिलताएं और लागतें आती हैं, और बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है। इस छूट से इन सब से बचा जा सकेगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास मौजूद शेयरों का प्रतिशत अपरिवर्तित रहेगा, जिससे कंपनी न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (Minimum Public Shareholding) की अनिवार्यताओं को पूरा करती रहेगी।

Gallantt Ispat Limited स्टील प्रोडक्ट्स, पावर जेनरेशन और एग्री-बिजनेस जैसे क्षेत्रों में काम करती है। यह भारत के स्टील सेक्टर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए जरूरी है।

यह रीस्ट्रक्चरिंग Gallantt Trust की स्थिति को Gallantt Ispat में मेजोरिटी शेयरहोल्डर के तौर पर और मजबूत करेगी। इसका मुख्य मकसद इंटरनल एस्टेट प्लानिंग और परिवार के सदस्यों के कल्याण से जुड़ा है, न कि कंपनी की व्यावसायिक रणनीति या ऑपरेशंस में तत्काल कोई बड़ा बदलाव लाने से।

SEBI की दी गई यह छूट इस बात पर निर्भर करती है कि रेगुलेटर को दी गई जानकारी कितनी सटीक है। यदि किसी भी तरह की गलत जानकारी या वादों का उल्लंघन होता है, तो यह छूट रद्द की जा सकती है या आगे नियामक कार्रवाई हो सकती है। यह छूट SEBI के आदेश की तारीख 20 मार्च 2026 से एक साल की अवधि के लिए वैध है। अगर अधिग्रहण इस अवधि के भीतर पूरा नहीं होता है, तो यह छूट अमान्य हो जाएगी।

Gallantt Ispat स्टील सेक्टर में Jindal Steel & Power Ltd, Tata Steel Ltd, और JSW Steel Ltd जैसी बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है।

निवेशकों को यह देखना होगा कि Gallantt Trust 20 मार्च 2027 तक शेयर अधिग्रहण का काम पूरा कर लेता है या नहीं। इसके बाद, अधिग्रहण पूरा होने के 21 दिनों के भीतर SEBI को रिपोर्ट फाइल करने जैसे कदम उठाए जाएंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.