SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क का क्या है मतलब?
SEBI का 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) फ्रेमवर्क, जिसे अक्टूबर 2023 में अपडेट किया गया था, के मुताबिक एक LC वह लिस्टेड एंटिटी (Listed Entity) होती है जिसके पास ₹1000 करोड़ या उससे ज़्यादा का आउटस्टैंडिंग लॉन्ग-टर्म बोरिंग (Outstanding Long-Term Borrowing) हो और क्रेडिट रेटिंग 'AA' या उससे बेहतर हो।
Rishi Laser ने यह कंफर्म करके कि वे इन थ्रेशोल्ड (Thresholds) के बाहर हैं, इस एडिशनल रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance) के बोझ से खुद को बचा लिया है। इससे कंपनी के फंडरेज़िंग (Fundraising) प्रोसेस में आसानी होगी।
SEBI के फ्रेमवर्क का बैकग्राउंड
SEBI ने यह LC फ्रेमवर्क पहली बार नवंबर 2018 में पेश किया था ताकि बड़ी कंपनियों को डेट मार्केट (Debt Market) से सीधे फंड जुटाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इसका मकसद बैंक लोन पर निर्भरता कम करना और कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट (Corporate Bond Market) में लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ाना था। अक्टूबर 2023 में इसके क्राइटेरिया को रिवाइज किया गया, जिसमें मिनिमम बोरिंग थ्रेशोल्ड को ₹1000 करोड़ तक बढ़ाया गया।
इस छूट का असर
इस कन्फर्मेशन का मतलब है कि Rishi Laser को डेट इश्यूएंस (Debt Issuances) के लिए लार्ज कॉर्पोरेट्स पर लागू होने वाले एनहांस्ड डिस्क्लोजर नॉर्म्स (Enhanced Disclosure Norms) का पालन नहीं करना पड़ेगा। कंपनी को अपने रेगुलेटरी ऑब्लिगेशन्स (Regulatory Obligations) पर स्पष्टता मिली है, जिससे एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्सिटीज (Administrative Complexities) कम होंगी।
