फिजिकल शेयरधारकों के लिए Reliance Industries का बड़ा कदम
SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने लंबे समय से शेयर बाजार को फिजिकल सर्टिफिकेट से हटाकर डीमैट (demat) फॉर्मेट में लाने की मुहिम छेड़ी हुई है। 1 अप्रैल 2019 से नए शेयर ट्रांसफर के लिए डीमैट अनिवार्य भी हो गया था। मगर, कुछ पुराने निवेशकों को अभी भी फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट को डीमैट में बदलने में दिक्कतें आ रही थीं। अब Reliance Industries (RIL) ने इसी समस्या को हल करने के लिए 10 अप्रैल 2026 को एक 'स्पेशल विंडो' खोली है, जो 4 फरवरी 2027 तक खुली रहेगी।
यह विंडो क्यों है अहम?
यह खास सुविधा उन निवेशकों के लिए है जिन्होंने 1 अप्रैल 2019 से पहले Reliance के फिजिकल शेयर खरीदे थे और डॉक्यूमेंटेशन (कागजी कार्रवाई) की कमी के चलते उन्हें डीमैट में कन्वर्ट नहीं करा पाए। इस विंडो के ज़रिए, वे अपनी पुरानी शेयर होल्डिंग्स को इलेक्ट्रॉनिक डीमैट फॉर्म में बदल सकते हैं। यह कदम न केवल निवेशकों को उनके एसेट्स को आसानी से मैनेज करने में मदद करेगा, बल्कि RIL के लिए भी शेयरधारक रिकॉर्ड को साफ-सुथरा बनाने में सहायक होगा।
निवेशकों को क्या करना होगा?
अगर आपके पास 1 अप्रैल 2019 से पहले खरीदे गए Reliance के फिजिकल शेयर हैं और उन्हें डीमैट कराने में कोई परेशानी आ रही थी, तो आप इस स्पेशल विंडो का लाभ उठा सकते हैं। पहले रिजेक्ट हुई ट्रांसफर रिक्वेस्ट्स को फिर से जमा किया जा सकता है।
जरूरी बातें:
- इस विंडो से ट्रांसफर किए गए सभी शेयर केवल डीमैट रूप में ही आपके खाते में जमा होंगे।
- डीमैट होने के बाद इन शेयरों पर ट्रांसफर रजिस्ट्रेशन की तारीख से 1 साल का लॉक-इन पीरियड लागू होगा।
- सभी योग्य निवेशकों को 4 फरवरी 2027 की अंतिम डेडलाइन तक यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
कंपनी के लिए सहूलियत
SEBI के 30 जनवरी 2026 के सर्कुलर के अनुपालन में, RIL यह कदम उठा रही है। बाजार में Reliance Industries अकेली ऐसी कंपनी नहीं है। Pfizer Limited, Reliance Infrastructure, और GMR Airports Limited जैसी कई बड़ी कंपनियों ने भी अपने फिजिकल शेयरधारकों के लिए ऐसी ही स्पेशल विंडोज़ खोली हैं। यह सब डीमैट सिस्टम को और मजबूत बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
