NCLT में फाइल हुई मर्जर की अर्जी
Refex Industries Limited ने कॉर्पोरेट पुनर्गठन (restructuring) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चेन्नई स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में एक अर्जी दायर की है। यह फाइलिंग 26 मार्च, 2026 को की गई है और कंपनी के ग्रीन मोबिलिटी बिज़नेस को एक साथ लाने की प्रक्रिया में यह एक अहम चरण है।
इस अर्जी में एक 'कम्पोजिट स्कीम ऑफ एमाल्गमेशन एंड अरेंजमेंट' का प्रस्ताव है। इसके तहत, Refex Green Mobility Limited को Refex Mobility Limited में मिलाया जाएगा, जिससे कंपनी के सभी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ऑपरेशन्स एक ही छतरी के नीचे आ जाएंगे।
यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि हाल ही में, 16 मार्च, 2026 को BSE और NSE दोनों से 'कोई प्रतिकूल अवलोकन पत्र' (no adverse observation letters) प्राप्त हो चुके थे। इन रेगुलेटरी क्लियरेंस के बाद, कंपनी अब NCLT से मंजूरी लेने की राह पर है ताकि इस स्कीम को अंतिम रूप दिया जा सके।
इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य Refex Industries के कॉर्पोरेट ढांचे को सुव्यवस्थित करना, ग्रीन मोबिलिटी सेक्टर पर फोकस बढ़ाना और संभावित रूप से Refex Mobility Limited को भविष्य में स्टॉक मार्केट में लिस्ट कराने की तैयारी करना है। माना जा रहा है कि इससे ऑपरेशन्स में एफिशिएंसी आएगी और शेयरहोल्डर वैल्यू बढ़ेगी।
इससे पहले, Refex Industries के बोर्ड ने 22 सितंबर, 2025 को ही इस स्कीम को मंजूरी दे दी थी। अब NCLT में फाइलिंग अगला बड़ा मील का पत्थर साबित हुई है।
निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को NCLT की कार्यवाही में संभावित देरी या ट्रिब्यूनल द्वारा लगाई जाने वाली किसी भी शर्त जैसे जोखिमों से अवगत रहना चाहिए। कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD), अनिल जैन, पहले SEBI द्वारा इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों में पेनाल्टी का सामना कर चुके हैं, हालांकि अपील लंबित रहने तक रिकवरी पर रोक लगा दी गई है। Refex Industries का कहना है कि इस रेगुलेटरी मामले का कंपनी पर कोई सीधा असर नहीं है। इसके अलावा, दिसंबर 2025 में इनकम टैक्स की सर्च भी हुई थी, जिस पर कंपनी ने कहा था कि इसका ऑपरेशनल कोई असर नहीं हुआ।
आगे चलकर, NCLT, चेन्नई बेंच द्वारा जारी किए जाने वाले विशिष्ट आदेशों और निर्देशों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। स्कीम को अंतिम रूप देने की समय-सीमा और Refex Mobility Limited की संभावित लिस्टिंग की ओर किसी भी प्रगति पर नजर रखी जाएगी। CMD की अपील प्रक्रिया पर भी अपडेट्स प्रासंगिक होंगे।