SEBI (Securities and Exchange Board of India) के insider trading नियमों का सख्ती से पालन करते हुए, Ravileela Granites Limited ने 1 अप्रैल, 2026 से अपनी शेयर ट्रेडिंग विंडो बंद कर दी है। इस अवधि में, कंपनी के सभी डेजिग्नेटेड पर्सन्स (designated persons), जिसमें कंपनी के अंदरूनी अधिकारी और उनके करीबी शामिल हैं, कंपनी के शेयर खरीद या बेच नहीं सकेंगे।
इस महत्वपूर्ण कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी के अनपब्लिश्ड प्राइस-सेंसिटिव इनफार्मेशन (unpublished price-sensitive information) का कोई गलत इस्तेमाल न हो और सभी शेयरधारकों के लिए एक निष्पक्ष ट्रेडिंग माहौल बना रहे। Ravileela Granites अपनी चौथी तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के ऑडिटर-समीक्षित वित्तीय नतीजों की घोषणा करने के 48 घंटे बाद ही इस ट्रेडिंग विंडो को फिर से खोलेगी।
कंपनी की बात करें तो, Ravileela Granites 1990 में स्थापित हुई थी और 1992 में पब्लिक हुई। यह मुख्य रूप से ग्रेनाइट स्लैब और टाइल्स के क्वेरींग, कटिंग, पॉलिशिंग और एक्सपोर्ट के कारोबार में है, और इसका फोकस अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया जैसे क्वालिटी-केंद्रित बाजारों पर रहा है।
हालांकि, हालिया वित्तीय प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। 31 मार्च, 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY25) में, Ravileela Granites को ₹3.21 करोड़ का शुद्ध घाटा (net loss) हुआ, जबकि रेवेन्यू ₹42.5 करोड़ रहा। यह पिछले साल FY24 के ₹0.60 करोड़ के घाटे से काफी ज्यादा है। कंपनी ने इस बढ़े हुए घाटे के लिए कच्चे माल की बढ़ती लागत और निवेशों पर हुए 'नॉटिनल फेयर वैल्यू एडजस्टमेंट' को जिम्मेदार ठहराया है।
वित्तीय स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी चिंताएं हैं। कंपनी की सेल्स ग्रोथ पिछले पांच सालों में धीमी रही है, जो केवल 5.40% है। वहीं, पिछले तीन सालों में रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) -30.7% रहा है। इसके अलावा, कंपनी के डेटर डेज़ (debtor days) औसतन 183 दिन रहे हैं, जो कैश कलेक्शन में संभावित देरी का संकेत देते हैं।
Ravileela Granites का मुकाबला ग्रेनाइट और मार्बल सेक्टर की अन्य प्रमुख कंपनियों जैसे Aro Granite Industries Ltd., Divyashakti Granites Ltd., Elegant Marbles & Granites Ltd., और Pokarna Ltd. से है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹39-40 करोड़ है, जो इस सेक्टर की दूसरी कंपनियों के मीडियन मार्केट कैप के आसपास है।
