Q4 FY26 में मुनाफे में बड़ी गिरावट, रेवेन्यू भी घटा
Ratnamani Metals & Tubes ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी के प्रदर्शन में बड़ी गिरावट देखी गई है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू साल-दर-साल 37% घटकर ₹1,084.82 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹1,715.15 करोड़ था। वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 43% की गिरावट आई और यह ₹115.91 करोड़ पर आ गया, जबकि पिछले साल यह ₹203.16 करोड़ था।
नतीजों पर मांग की मार
कंपनी ने बताया कि इस गिरावट का मुख्य कारण बाजार में मांग का कमजोर होना और बिक्री की मात्रा में कमी है। इसके चलते फिक्स्ड कॉस्ट का ठीक से इस्तेमाल (under-absorption) नहीं हो पाया, जिसने सीधे तौर पर प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित किया। अकेले स्टैंडअलोन (standalone) नतीजों में रेवेन्यू ₹893.00 करोड़ रहा और PAT ₹92.90 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी का स्टैंडअलोन ऑर्डर बुक फाइनेंशियल ईयर 26 के अंत तक ₹1,800 करोड़ से अधिक था।
डिविडेंड की घोषणा और भविष्य की योजनाएं
बाजार की चुनौतियों के बावजूद, कंपनी ने शेयरधारकों को ₹10 प्रति शेयर (500%) का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। कंपनी की सब्सिडियरीज़, Ravi Technoforge (RTL) और Ratnamani Finow Spooling Solutions (RFSS), ने अच्छा प्रदर्शन किया है। Ratnamani Metals & Tubes कार्बन स्टील और स्टेनलेस स्टील पाइप्स और ट्यूब्स की एक प्रमुख निर्माता है, जो ऑयल एंड गैस, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर जैसे अहम सेक्टर्स में सप्लाई करती है।
विस्तार पर जोर
कंपनी रणनीतिक क्षमता विस्तार (capacity expansion) में निवेश जारी रखे हुए है। इसमें HSAW पाइप्स, कोटिंग प्लांट्स और स्पूल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज का विस्तार शामिल है। ये विस्तार भारत और मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे हैं, जो कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ योजनाओं को दर्शाते हैं।
आगे क्या देखें?
- कुच में नई कार्बन स्टील HSAW स्पाइरल पाइप फैसिलिटी का जून 2026 तक पूरा होना।
- ओडिशा कोटिंग प्लांट मई 2026 तक।
- RFSS स्पूल मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार दिसंबर 2026 तक।
- RTL में हॉट फॉर्मिंग फैसिलिटी दिसंबर 2026 तक।
- Ratnamani Middle East Company LLC मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी मार्च 2027 तक।
जोखिम फैक्टर
बाजार में मांग का लगातार कमजोर रहना और क्षमता का कम उपयोग होने से मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है। अगर बिक्री की मात्रा नहीं बढ़ती है तो फिक्स्ड कॉस्ट का कम अवशोषण एक चुनौती बनी रहेगी। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक (geopolitical) घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन को प्रभावित कर सकते हैं।