शेयरधारकों का भारी समर्थन
Ramkrishna Forgings Limited ने आज पोस्टल बैलेट ई-वोटिंग के नतीजे जारी किए। इन नतीजों के अनुसार, शेयरधारकों ने श्री चेतन रमेशचंद्र देसाई की नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के पद पर नियुक्ति का तहे दिल से समर्थन किया है। श्री देसाई 29 अप्रैल, 2026 से शुरू होकर अगले 5 साल यानी 28 अप्रैल, 2031 तक इस पद पर बने रहेंगे।
ई-वोटिंग प्रक्रिया, जो 27 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुई, में कुल 11,11,67,453 इक्विटी शेयर्स डाले गए। इनमें से भारी बहुमत, यानी 98.03% ( 10,89,81,135 शेयर्स) ने श्री देसाई की नियुक्ति के पक्ष में वोट दिया, जबकि केवल 1.97% ( 21,86,318 शेयर्स) ने इसके विरोध में वोट डाला।
गवर्नेंस को मिलेगी नई मजबूती
एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की नियुक्ति किसी भी कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिए बहुत अहम होती है। ऐसे डायरेक्टर बोर्ड की चर्चाओं में एक निष्पक्ष नजरिया लाते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि फैसले सभी हितधारकों के सर्वोत्तम हित में हों।
श्री देसाई, जो एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और जिन्हें कॉर्पोरेट गवर्नेंस व ऑडिटिंग में लगभग 40 साल का अनुभव है, से कंपनी के निगरानी तंत्र को काफी बल मिलने की उम्मीद है।
कंपनी की पिछली चुनौतियाँ
Ramkrishna Forgings, जो भारत की दूसरी सबसे बड़ी फोर्जिंग कंपनी है, ऑटोमोटिव और रेलवे जैसे उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स बनाती है। मई 2025 में, कंपनी को तब कुछ सवालों का सामना करना पड़ा था जब उसके वैधानिक ऑडिटर ने FY25 के लिए इन्वेंट्री अकाउंटिंग में बड़ी विसंगतियों के कारण क्वालिफाइड ओपिनियन जारी किया था। इसके बाद एक बाहरी एजेंसी को इस मामले का आकलन करने के लिए नियुक्त किया गया था। कंपनी ने पहले सेबी के साथ लिस्टिंग और डिस्क्लोजर नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों को भी सुलझाया है, जो मजबूत गवर्नेंस की जरूरत को और उजागर करता है।
आगे क्या देखना होगा?
- श्री देसाई अब Ramkrishna Forgings के बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर शामिल होंगे।
- उनका 5 साल का कार्यकाल 29 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा।
- उनके अनुभव से बोर्ड की निगरानी और गवर्नेंस स्ट्रक्चर को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
निगरानी के बिंदु: कंपनी के पिछले इन्वेंट्री प्रबंधन के मुद्दे और FY25 के लिए ऑडिट रिपोर्ट पर नजर रखनी होगी। साथ ही, सेबी के साथ पिछली सुलह को देखते हुए रेगुलेटरी कंप्लायंस पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
