FY26 के नतीजे: एक नज़र
Ramkrishna Forgings Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए अपने ऑडिटेड वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने स्टैंडअलोन आधार पर ₹11,671.02 लाख यानी ₹1167 करोड़ का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) हासिल किया है। वहीं, कंसोलिडेटेड आधार पर PBT ₹8,401.32 लाख यानी ₹840 करोड़ दर्ज किया गया है। कंपनी ने शेयरधारकों को तोहफा देते हुए ₹1 प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है।
कंपनी का कारोबार और चुनौतियाँ
Ramkrishna Forgings ऑटोमोटिव, रेलवे और फार्म इक्विपमेंट जैसे प्रमुख सेक्टरों के लिए फोर्ज्ड, मशीनीकृत और फैब्रिकेटेड कंपोनेंट्स बनाने का काम करती है। कंपनी का निर्यात 22 देशों में फैला हुआ है।
हालांकि, FY25 में कंपनी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन घटकर 13.9% रह गया और ऑपरेटिंग एक्टिविटीज से नेट कैश में भी गिरावट देखी गई। पिछली इन्वेंटरी अकाउंटिंग की गलतियों के कारण FY24-FY25 के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में रीस्टेटमेंट भी करने पड़े, जिससे अनुमानित नुकसान हुआ।
कर्ज का बोझ और वित्तीय स्थिति
कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो, 31 मार्च 2026 तक कंसोलिडेटेड आधार पर कुल लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग (कर्ज) ₹1,478.21 करोड़ थी। उसी तारीख को कंपनी का नेट वर्थ ₹3,274.78 करोड़ था। कंपनी का बिजनेस कैपिटल-इंटेंसिव है, जिसमें लंबे एक्सपोर्ट डेटर साइकिल और इन्वेंटरी होल्डिंग पीरियड शामिल हैं।
शेयरधारकों के लिए मायने
घोषित किया गया अंतरिम डिविडेंड सीधे शेयरधारकों को रिटर्न देगा। इसके अलावा, कंपनी ने अपने एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन स्कीम 2023 के तहत ₹556 प्रति शेयर की दर से 1,64,413 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। दो इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स 20 मई 2026 को अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए अहम बातें
निवेशक कंपनी के भारी कर्ज ₹1,478.21 करोड़ पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। पिछली अकाउंटिंग गलतियों और रेवेन्यू रिकग्निशन पॉलिसी में बदलावों पर भी ध्यान देना होगा। साथ ही, ऑटोमोटिव और रेलवे जैसे साइक्लिकल सेक्टर पर निर्भरता एक और जोखिम है।
प्रतिस्पर्धा और भविष्य की राह
Ramkrishna Forgings का मुकाबला भारत फोर्ज जैसी बड़ी कंपनियों से है। AIA Engineering, Craftsman Automation, और Sona BLW Precision Forgings भी इस क्षेत्र की अन्य प्रमुख कंपनियां हैं।
आगे चलकर, निवेशकों की नजर AGM में होने वाली नियुक्तियों, जैसे कॉस्ट ऑडिटर और मैनेजिंग डायरेक्टर के री-अपॉइंटमेंट पर रहेगी। कंपनी अपने कर्ज को कैसे मैनेज करती है और प्रॉफिट मार्जिन कैसे सुधारती है, यह भी देखना अहम होगा।
