कंपनी के नतीजों पर एक नजर
Rajoo Engineers ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए अपने कॉन्सॉलिडेटेड नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने ₹344.25 करोड़ का कुल रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि उसका नेट प्रॉफिट (PAT) ₹48.90 करोड़ रहा। अगर स्टैंडअलोन परफॉर्मेंस की बात करें, तो कंपनी का PAT ₹43.28 करोड़ रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) के ₹259 करोड़ के रेवेन्यू से काफी बेहतर है। (FY25 का स्टैंडअलोन PAT नहीं बताया गया है)।
डिविडेंड और गवर्नेंस अपडेट्स
कंपनी के डायरेक्टर्स बोर्ड ने शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के बाद ₹0.15 प्रति इक्विटी शेयर का फाइनल डिविडेंड देने का प्रस्ताव रखा है। इसे आने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में अंतिम मंजूरी मिलनी है। गवर्नेंस के मोर्चे पर, कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर, श्री निखिल वी. गज्जर ने 30 अप्रैल, 2026 से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने M/s. Savjani and Associates को इंटरनल ऑडिटर और M/s. Shailesh Thaker & Associates को 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर के तौर पर फिर से नियुक्त किया है।
ग्रोथ स्ट्रैटेजी और मार्केट में पोजीशन
1986 में स्थापित Rajoo Engineers, प्लास्टिक एक्सट्रूजन मशीनरी मार्केट में एक बड़ा नाम है और 70 से अधिक देशों में इसकी मौजूदगी है। कंपनी अपनी ऑपरेशनल रफ्तार को बनाए रखने के लिए स्ट्रैटेजिक पहल कर रही है। इसमें जुलाई 2025 में ₹180 करोड़ जुटाने के लिए किया गया क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (QIP) शामिल है, जिसका इस्तेमाल एक्सपेंशन के लिए किया जाएगा। इस फंडिंग से Kohli Printing And Converting Machines Private Limited में 60% हिस्सेदारी का अधिग्रहण भी हुआ, जिससे कंपनी का पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ है। Rajoo Engineers, Mamata Enterprises और Diffusion Engineers जैसे खिलाड़ियों से मुकाबला करती है, लेकिन अपने मजबूत एक्सपोर्ट नेटवर्क और 60% से अधिक के रिपीट ऑर्डर रेट के कारण अलग पहचान रखती है।
नए लेबर कोड्स का मूल्यांकन
निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात कंपनी द्वारा नए लेबर कोड्स का मूल्यांकन है। हालांकि इससे जुड़े नियम अभी नोटिफाई होने बाकी हैं, शुरुआती जांच से कोई बड़ा तत्काल प्रभाव नहीं दिख रहा है। लेकिन, भविष्य में इसके संभावित वित्तीय प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण जारी है।
निवेशकों को इन बातों पर रखना होगा ध्यान
शेयरहोल्डर्स और बाजार को मुख्य रूप से इन बातों पर नजर रखनी चाहिए: AGM में ₹0.15 प्रति शेयर डिविडेंड को अंतिम मंजूरी, नए लेबर कोड्स के मूल्यांकन और इसके संभावित वित्तीय नतीजों पर अपडेट, आने वाली तिमाहियों में रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी की ग्रोथ, और हालिया अधिग्रहणों के इंटीग्रेशन व एक्सपेंशन योजनाओं में QIP फंड के इस्तेमाल की प्रगति।
