Rajoo Engineers के FY26 के नतीजे
Rajoo Engineers Ltd. ने 28 अप्रैल, 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग के बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 (31 मार्च, 2026 को समाप्त) के लिए अपने ऑडिटेड वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रिवेन्यू ₹34,425.29 लाख यानी ₹344.25 करोड़ रहा, जबकि कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹4,889.58 लाख यानी ₹48.90 करोड़ दर्ज किया गया।
स्टैंडअलोन (Standalone) आधार पर, कंपनी का रिवेन्यू ₹29,828.51 लाख यानी ₹298.29 करोड़ था, और PAT ₹4,328.13 लाख यानी ₹43.28 करोड़ रहा।
डिविडेंड और ऑडिटर नियुक्ति
कंपनी के बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹0.15 प्रति इक्विटी शेयर के अंतिम डिविडेंड (Final Dividend) की सिफारिश की है, जो शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन होगा। इसके अलावा, बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए Savjani and Associates को इंटरनल ऑडिटर और Shailesh Thaker & Associates को कॉस्ट ऑडिटर के तौर पर पुनः नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। साथ ही, कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर, श्री निखिल वी. गज्जर के 30 अप्रैल, 2026 से इस्तीफे को भी स्वीकार किया गया है।
पिछली तिमाही में शानदार प्रदर्शन
Rajoo Engineers ने मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में लगातार 11वीं तिमाही सकारात्मक नतीजे दर्ज किए हैं। वित्तीय वर्ष 25-26 की तीसरी तिमाही में, कंपनी का रिवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 56.21% बढ़कर ₹87.60 करोड़ हो गया था, और नेट प्रॉफिट 90.21% की भारी उछाल के साथ ₹17.88 करोड़ तक पहुंच गया था।
ग्रोथ के लिए उठाए कदम
अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी के तहत, कंपनी ने जुलाई 2025 में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए ₹160 करोड़ जुटाए थे। साथ ही, कंपनी ने Kohli Printing and Converting Machines Pvt. Ltd. में 60% बहुमत हिस्सेदारी का अधिग्रहण भी किया है। इससे पहले, वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए, Rajoo Engineers ने 25% का अंतिम डिविडेंड (बोनस शेयर इश्यू के बाद ₹0.125 प्रति शेयर) और अक्टूबर 2024 में 1:3 का बोनस शेयर इश्यू भी मंजूर किया था।
नए लेबर कोड का असर
कंपनी ने नए लेबर कोड्स (Labour Codes) के संभावित वित्तीय प्रभाव पर चिंता जताई है। हालांकि इन कोड्स का उद्देश्य नियमों को सरल बनाना है, लेकिन ये कर्मचारी लागतों में वृद्धि और पे स्ट्रक्चर में बदलाव का कारण बन सकते हैं। इनका सटीक वित्तीय प्रभाव अभी भी अनिश्चित बना हुआ है, जो नवंबर 2025 से लागू होने वाले हैं।
इंडस्ट्री में प्रतिद्वंद्वी
भारतीय प्लास्टिक एक्सट्रूज़न मशीनरी बाजार में Kabra Extrusiontechnik एक प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है। यह भारत की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी है और Battenfeld-Cincinnati जैसी कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग करती है।
