Rajeswari Infrastructure Share: कंपनी पर मंडराए खतरे के बादल! रेवेन्यू **98%** गिरा, ऑडिटर ने कहा - 'हम जांच नहीं कर सकते'

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AuthorNeha Patil|Published at:
Rajeswari Infrastructure Share: कंपनी पर मंडराए खतरे के बादल! रेवेन्यू **98%** गिरा, ऑडिटर ने कहा - 'हम जांच नहीं कर सकते'
Overview

Rajeswari Infrastructure Ltd ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी का सालाना रेवेन्यू **98.23%** गिरकर सिर्फ **₹0.09 लाख** रह गया है। कंपनी को **₹13.05 लाख** का नेट लॉस (Net Loss) हुआ है, और सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऑडिटर ने कंपनी के वित्तीय ब्यौरे की पुष्टि करने में असमर्थता जताई है।

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ऑडिटर की चेतावनियाँ और गहरे संकट के संकेत

Rajeswari Infrastructure Ltd के लिए वित्त वर्ष 2026 (FY26) बेहद निराशाजनक रहा है। चौथी तिमाही (Q4 FY26) में कंपनी का रेवेन्यू 99.60% गिरकर महज ₹0.02 लाख पर आ गया। पूरे साल का रेवेन्यू पिछले साल के ₹5.08 लाख से घटकर ₹0.09 लाख हो गया, जो 98.23% की भारी गिरावट है।

कंपनी को इस तिमाही में ₹4.26 लाख का नेट लॉस (Net Loss) हुआ, और पूरे साल का घाटा बढ़कर ₹13.05 लाख तक पहुंच गया। प्रति शेयर आय (EPS) भी घटकर ₹(0.24) हो गई।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कंपनी के ऑडिटर ने वित्तीय ब्यौरे (Financial Statements) पर 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' (Disclaimer of Opinion) जारी किया है। इसका मतलब है कि ऑडिटर इन आंकड़ों की सटीकता को सत्यापित करने में सक्षम नहीं थे। इसके पीछे का एक कारण यह भी है कि कंपनी ने इन्वेंटरी (Stock) का फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं किया और एसेट इंपेयरमेंट (Asset Impairment) का आकलन भी नहीं किया।

कंपनी की वित्तीय हालत और मुद्दे

Rajeswari Infrastructure की नेट वर्थ (Net Worth) ₹(91.08) लाख के नकारात्मक स्तर पर पहुंच गई है। इसका मतलब है कि कंपनी की देनदारियां उसकी संपत्तियों से कहीं ज्यादा हैं।

इसके अलावा, कंपनी को इनकम टैक्स एक्ट के TDS (Tax Deducted at Source) से संबंधित कुछ प्रावधानों का पालन न करने जैसी अनुपालन (Compliance) संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।

CIRP से बाहर आने के बाद भी नहीं सुधरी हालत

यह नतीजे Rajeswari Infrastructure के लिए चिंताजनक स्थिति दर्शाते हैं, खासकर तब जब कंपनी हाल ही में जनवरी 2026 में कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से बाहर निकली है। CIRP का मकसद वित्तीय संकट से जूझ रही कंपनियों को पुनर्जीवित करना होता है, लेकिन ये नतीजे बताते हैं कि कंपनी अभी तक पटरी पर नहीं लौट पाई है।

निवेशकों और हितधारकों के लिए जोखिम

शेयरधारकों के लिए यह स्थिति काफी अनिश्चित है, क्योंकि कंपनी की आय न्यूनतम है और नेट वर्थ नकारात्मक। ऑडिटर के डिस्क्लेमर से वित्तीय आंकड़ों पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। कंपनी की ऑपरेशनल निरंतरता और भविष्य में फंडिंग की संभावनाएं भी वित्तीय संकट और अनुपालन मुद्दों के कारण अनिश्चित हैं। कंपनी को अपनी विश्वसनीयता बनाने के लिए बुनियादी लेखांकन प्रक्रियाओं और सत्यापन पर ध्यान देना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.