Rajeswari Infrastructure: ऑडिटर ने ₹35 करोड़ की देनदारियों पर उठाए सवाल, कंपनी की हालत गंभीर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Rajeswari Infrastructure: ऑडिटर ने ₹35 करोड़ की देनदारियों पर उठाए सवाल, कंपनी की हालत गंभीर
Overview

Rajeswari Infrastructure के शेयरधारकों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025 की पहली तिमाही (Q1 FY25) में **₹0.03 करोड़** का नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि रेवेन्यू सिर्फ **₹0.03 लाख** रहा। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि कंपनी के ऑडिटर ने **₹35.34 करोड़** की महत्वपूर्ण देनदारियों (Liabilities) और एसेट्स की पुष्टि करने में असमर्थता जताई है, जिससे कंपनी की भविष्य की स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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क्या हैं ऑडिटर की चिंताएं?

Rajeswari Infrastructure Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2025 की पहली तिमाही (Q1 FY25) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी को ₹0.03 करोड़ (लगभग ₹3.02 लाख) का स्टैंडअलोन नेट लॉस हुआ है, जबकि इस दौरान कुल स्टैंडअलोन रेवेन्यू महज ₹0.03 लाख रहा। यह पिछले साल की पहली तिमाही (Q1 FY24) के ₹0.05 लाख के रेवेन्यू के मुकाबले 40% की बड़ी गिरावट दिखाता है।

वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल

कंपनी के वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditors) ने 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' जारी किया है, जिसका सीधा मतलब है कि वे कंपनी की अधिकांश एसेट्स, लायबिलिटीज और आय की पुष्टि के लिए पर्याप्त सबूत नहीं जुटा सके। ऐसे में, पेश किए गए वित्तीय आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता।

सबसे गंभीर बात यह है कि कंपनी ₹35.34 करोड़ से अधिक की उन कंटिंजेंट लायबिलिटीज (Contingent Liabilities) को स्वीकार करती है, जिनका कोई प्रोविजन नहीं किया गया है। ये दावे कंपनी की कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से जुड़े हैं। ऑडिटर के मुताबिक, अगर इन देनदारियों को प्रोविजन किया जाता, तो रिपोर्टेड नेट लॉस और भी काफी बढ़ जाता।

इसके अलावा, ऑडिटर ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (यानी, भविष्य में अपना संचालन जारी रखने की क्षमता) पर एक महत्वपूर्ण अनिश्चितता बताई है। यह कंपनी के भविष्य और अस्तित्व पर गहरा सवाल खड़े करता है। कंपनी का ₹0.47 करोड़ का निगेटिव रिजर्व (Negative Reserves) शेयरहोल्डर कैपिटल के खत्म होने का संकेत देता है।

CIRP प्रक्रिया का क्या है हाल?

Rajeswari Infrastructure मई 2023 से नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के तहत कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। NCLT ने 14 सितंबर, 2024 तक इस प्रक्रिया को बढ़ाया है, क्योंकि क्रेडिटर्स की कमेटी (Committee of Creditors) एक रेजोल्यूशन प्लान पर विचार कर रही है।

निवेशकों के लिए outlook

शेयरधारकों के लिए स्थिति काफी चिंताजनक है। ऑडिटर का डिस्क्लेमर कंपनी के वित्तीय बयानों पर विश्वास को कम करता है। अनप्रोविजन्ड देनदारियों की विशाल राशि दर्शाती है कि कंपनी का वित्तीय संकट रिपोर्ट किए गए नुकसान से कहीं ज्यादा गहरा है। गोइंग कंसर्न की अनिश्चितता के साथ मिलकर, यह कंपनी के संचालन बंद होने के बड़े जोखिम का संकेत देता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.