क्या हैं ऑडिटर की चिंताएं?
Rajeswari Infrastructure Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2025 की पहली तिमाही (Q1 FY25) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी को ₹0.03 करोड़ (लगभग ₹3.02 लाख) का स्टैंडअलोन नेट लॉस हुआ है, जबकि इस दौरान कुल स्टैंडअलोन रेवेन्यू महज ₹0.03 लाख रहा। यह पिछले साल की पहली तिमाही (Q1 FY24) के ₹0.05 लाख के रेवेन्यू के मुकाबले 40% की बड़ी गिरावट दिखाता है।
वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल
कंपनी के वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditors) ने 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' जारी किया है, जिसका सीधा मतलब है कि वे कंपनी की अधिकांश एसेट्स, लायबिलिटीज और आय की पुष्टि के लिए पर्याप्त सबूत नहीं जुटा सके। ऐसे में, पेश किए गए वित्तीय आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता।
सबसे गंभीर बात यह है कि कंपनी ₹35.34 करोड़ से अधिक की उन कंटिंजेंट लायबिलिटीज (Contingent Liabilities) को स्वीकार करती है, जिनका कोई प्रोविजन नहीं किया गया है। ये दावे कंपनी की कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से जुड़े हैं। ऑडिटर के मुताबिक, अगर इन देनदारियों को प्रोविजन किया जाता, तो रिपोर्टेड नेट लॉस और भी काफी बढ़ जाता।
इसके अलावा, ऑडिटर ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (यानी, भविष्य में अपना संचालन जारी रखने की क्षमता) पर एक महत्वपूर्ण अनिश्चितता बताई है। यह कंपनी के भविष्य और अस्तित्व पर गहरा सवाल खड़े करता है। कंपनी का ₹0.47 करोड़ का निगेटिव रिजर्व (Negative Reserves) शेयरहोल्डर कैपिटल के खत्म होने का संकेत देता है।
CIRP प्रक्रिया का क्या है हाल?
Rajeswari Infrastructure मई 2023 से नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के तहत कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। NCLT ने 14 सितंबर, 2024 तक इस प्रक्रिया को बढ़ाया है, क्योंकि क्रेडिटर्स की कमेटी (Committee of Creditors) एक रेजोल्यूशन प्लान पर विचार कर रही है।
निवेशकों के लिए outlook
शेयरधारकों के लिए स्थिति काफी चिंताजनक है। ऑडिटर का डिस्क्लेमर कंपनी के वित्तीय बयानों पर विश्वास को कम करता है। अनप्रोविजन्ड देनदारियों की विशाल राशि दर्शाती है कि कंपनी का वित्तीय संकट रिपोर्ट किए गए नुकसान से कहीं ज्यादा गहरा है। गोइंग कंसर्न की अनिश्चितता के साथ मिलकर, यह कंपनी के संचालन बंद होने के बड़े जोखिम का संकेत देता है।
