Rajeswari Infrastructure FY25 नतीजे: ऑडिटर ने चेताया, कंपनी के भविष्य पर गहराया संकट!
Rajeswari Infrastructure Limited ने 31 मार्च, 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY25) के लिए अपने ऑडिटेड वित्तीय नतीजे पेश किए हैं, जो चिंताजनक हैं। कंपनी ने इस दौरान ₹0.09 करोड़ (यानी ₹9.11 लाख) का शुद्ध नुकसान (Net Loss) दर्ज किया है, जबकि कुल आय सिर्फ ₹0.05 करोड़ (यानी ₹5.08 लाख) रही। लेकिन, इन नतीजों से ज़्यादा बड़ी खबर कंपनी के ऑडिटर का 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' (Disclaimer of Opinion) जारी करना है। इसका मतलब है कि ऑडिटर के पास कंपनी की वित्तीय जानकारी की सटीकता और निष्पक्षता की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे।
इस डिस्क्लेमर के जारी होने से कंपनी की एसेट्स (Assets) के मूल्यांकन, देनदारियों (Liabilities), शुरुआती वित्तीय बैलेंस और कंपनी के भविष्य में संचालन जारी रखने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा मंजूर किए गए रेज़ोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए इन बिंदुओं पर स्पष्टता बेहद ज़रूरी है।
यह कंपनी 10 मई, 2023 को Intec Capital Limited की याचिका के बाद फाइनेंशियल रिकवरी प्रोसेस (CIRP) में गई थी। इस दौरान कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। एक लंबी प्रक्रिया के बाद, 13 जनवरी, 2026 को NCLT ने श्री गुरुस्वामी राममूर्ति (Mr. Guruswamy Ramamurthy) द्वारा प्रस्तावित एक रेज़ोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी, जिससे रिकवरी की कार्यवाही समाप्त हुई। अब, एक मॉनिटरिंग कमेटी (Monitoring Committee) कंपनी के संचालन की देखरेख कर रही है और अप्रूव्ड प्लान को लागू करने की ज़िम्मेदारी इसी कमेटी पर है।
इस रिकवरी के बाद, कंपनी में कई बड़े बदलाव हुए हैं। सबसे प्रमुख है बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की जगह एक नई मॉनिटरिंग कमेटी का आना, जो रणनीतिक फैसले लेगी। कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऑडिटर की चिंताओं को दूर करना और वित्तीय रिपोर्टिंग में विश्वास बहाल करना है। इसके अलावा, ₹35.34 करोड़ के रिकवरी प्रोसेस ड्यूज़ (Dues) से जुड़ी संभावित देनदारी एक बड़ा वित्तीय बोझ साबित हो सकती है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि Rajeswari Infrastructure की स्थिति, Larsen & Toubro Ltd, Tata Projects Ltd, NCC Ltd और IRB Infrastructure Developers Ltd जैसी बड़ी भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों से बिल्कुल अलग है। वे कंपनियां एक अलग स्तर पर काम करती हैं और इस तरह की ऑडिट योग्यताओं और वित्तीय रिकवरी की चुनौतियों का सामना नहीं कर रही हैं। FY25 के लिए कंपनी के मुख्य वित्तीय आंकड़े इस प्रकार हैं: कुल आय ₹5.08 लाख और शुद्ध नुकसान ₹9.11 लाख। 31 मार्च, 2025 तक, रिकवरी प्रोसेस ड्यूज़ के लिए संभावित देनदारी ₹35.34 करोड़ थी, और ₹1.21 करोड़ के लोन और एडवांसेज (Loans and Advances) शायद वसूल नहीं हो पाएंगे।
आगे चलकर, निवेशकों को NCLT-अप्रूव्ड रेज़ोल्यूशन प्लान के कार्यान्वयन, भविष्य के ऑडिट्स में ऑडिटर के रुख, मॉनिटरिंग कमेटी की परिचालन स्थिरता और वित्तीय रिपोर्टिंग में सुधार के संकेतों पर नज़र रखनी चाहिए।
