Rajesh Power Services IPO: ₹8.57 Cr का सरप्लस अब वर्किंग कैपिटल में, जानें पूरी कहानी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Rajesh Power Services IPO: ₹8.57 Cr का सरप्लस अब वर्किंग कैपिटल में, जानें पूरी कहानी
Overview

Rajesh Power Services Ltd ने कन्फर्म किया है कि उसके ₹160.47 करोड़ के इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के फंड का इस्तेमाल ठीक उसी तरह हुआ है जैसा प्लान किया गया था, इसमें कोई बदलाव नहीं है। कंपनी की ऑडिट कमेटी और बोर्ड ने फंड यूटिलाइजेशन स्टेटमेंट को मंजूरी दे दी है। उम्मीद से कम IPO खर्चे होने के कारण ₹8.57 करोड़ का सरप्लस निकला है, जिसे अब वर्किंग कैपिटल बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

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IPO फंड का सही इस्तेमाल, ₹8.57 करोड़ का सरप्लस अब वर्किंग कैपिटल के लिए

Rajesh Power Services Ltd ने स्पष्ट किया है कि उसके ₹160.47 करोड़ के इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) से जुटाए गए पैसे पूरी तरह से योजना के मुताबिक ही इस्तेमाल हुए हैं, इसमें कोई विचलन (deviation) नहीं है। कंपनी की ऑडिट कमेटी और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने फंड के इस्तेमाल की स्टेटमेंट को हरी झंडी दिखा दी है। IPO पर उम्मीद से कम खर्च होने की वजह से ₹8.57 करोड़ का एक सरप्लस (अतिरिक्त राशि) निकला है, जिसे अब कंपनी ने अपनी वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) को मजबूत करने के लिए आवंटित किया है।

यह जानकारी कंपनी की ओर से IPO प्रोसीड्स के लिए 'Statement of Deviation or Variation' फाइलिंग के जरिए सामने आई है। कंपनी ने फ्रेश इश्यू से ₹93.47 करोड़ और ऑफर फॉर सेल (OFS) से ₹67.00 करोड़ जुटाए थे। IPO पर हुआ असल खर्च ₹14.34 करोड़ रहा, जो कि अनुमानित ₹15.50 करोड़ से कम था।

इस लागत बचत के चलते ही ₹8.57 करोड़ का यह सरप्लस उपलब्ध हुआ। राजेश पावर सर्विसेज ने इस अतिरिक्त राशि का उपयोग अपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए करने का फैसला किया है। यह कदम कंपनी के ऑपरेशनल लचीलेपन (operational flexibility) को बढ़ा सकता है और रोजमर्रा के व्यावसायिक कामों को सहारा दे सकता है।

जो कंपनी 28 नवंबर 2024 को पब्लिक हुई थी, उसने शुरुआत में IPO फंड का इस्तेमाल कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) के लिए करने की योजना बनाई थी। इसमें नए उपकरण खरीदना, एक सोलर पावर प्लांट लगाना और ग्रीन हाइड्रोजन में विशेषज्ञता बढ़ाना शामिल था, साथ ही जनरल कॉर्पोरेट पर्पज और शुरुआती वर्किंग कैपिटल की जरूरतें भी पूरी की जानी थीं। 1971 में स्थापित राजेश पावर सर्विसेज, पावर सेक्टर में एक जानी-मानी EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) कॉन्ट्रैक्टर है और इसका ऑर्डर बुक भी काफी मजबूत है।

फंड के इस्तेमाल में योजना का पालन करना और सरप्लस की पारदर्शी रिपोर्टिंग, कंपनी के गवर्नेंस और वित्तीय प्रबंधन में निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है।

पावर EPC सेक्टर में काम करने वाली राजेश पावर सर्विसेज के कुछ प्रमुख प्रतिद्वंद्वी (peers) KEC International Ltd और Kalpataru Projects International Ltd जैसी कंपनियां हैं, जो पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन EPC में सक्रिय हैं। वहीं, Skipper Ltd और HG Infra Engineering Ltd जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटीज फर्म भी संबंधित क्षेत्रों में काम करती हैं, भले ही उनके बिजनेस मॉडल थोड़े अलग हों।

निवेशक अब कंपनी के प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन, आवंटित वर्किंग कैपिटल का ऑपरेशनल एफिशिएंसी और लिक्विडिटी पर असर, और भविष्य के वित्तीय प्रदर्शन और ग्रोथ गाइडेंस पर बारीकी से नजर रखेंगे। पावर EPC सेक्टर को प्रभावित करने वाली नई प्रोजेक्ट जीत और व्यापक बाजार की स्थितियों पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.