नतीजे और ऑर्डर बुक
कंपनी का कुल अन-एग्जीक्यूटेड (unexecuted) ऑर्डर बुक ₹3,326 करोड़ का है, जो मुख्य रूप से पावर डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट से जुड़ा है। राजेश पावर सर्विसेज लिमिटेड (RPSL) ने 65 MW की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजना के साथ इस तेजी से बढ़ते एनर्जी सेगमेंट में भी कदम रखा है। यह नया प्रोजेक्ट गुजरात में स्थापित होगा।
आगे की राह और ग्रोथ का लक्ष्य
कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि वे लगातार आक्रामक ग्रोथ बनाए रखेंगे और फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए रेवेन्यू में 40% की वृद्धि का लक्ष्य रखा है। RPSL पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) में एक प्रमुख EPC (Engineering, Procurement, and Construction) कंपनी के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी है, और अब BESS में एंट्री से कंपनी की आय के नए स्रोत खुलेंगे।
एनालिस्ट्स की चिंताएं और रिस्क
हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स ने कंपनी के वर्किंग कैपिटल पर दबाव की चिंता जताई है। 85-90% ऑर्डर बुक के गुजरात पर केंद्रित होने और ₹305 करोड़ के रिटेंशन मनी के वित्तीय संपत्तियों में फंसे होने से लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है। साथ ही, कंपनी की देनदारियां (receivables) दोगुनी हो गई हैं और कम अवधि का कर्ज (short-term debt) भी बढ़ा है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या कंपनी प्रबंधन के 45-60 दिन के लक्ष्य के भीतर मार्च की देनदारियों की वसूली कर पाती है। इसके अलावा, ₹2,200 करोड़ की नई ऑर्डर बोलियों (bids) की प्रगति, गुजरात से बाहर ऑर्डर बुक का विविधीकरण (diversification), और 65 MW BESS प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और वित्तीय व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण होंगी।
