SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' नियमों से बाहर
Rajdarshan Industries Ltd. ने साफ कर दिया है कि वह सेबी (SEBI) के उन मापदंडों को पूरा नहीं करती है जिसके तहत किसी कंपनी को 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) माना जाता है। कंपनी ने 31 मार्च, 2025 तक शून्य (NIL) आउटस्टैंडिंग बॉरोइंग (Outstanding Borrowing) की रिपोर्ट दी है।
क्या है एग्ज़ेम्प्शन का मतलब?
इस स्टेटस का मतलब है कि Rajdarshan Industries, जो माइनिंग और मिनरल्स सेक्टर में काम करती है, अब SEBI के उन खास नियमों के अधीन नहीं होगी जो LC कंपनियों के लिए डेट सिक्योरिटीज के ज़रिए फंड जुटाने को लेकर हैं। SEBI का यह फ्रेमवर्क चाहता है कि योग्य कंपनियां अपने उधार का एक हिस्सा ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स के ज़रिए जुटाएं।
SEBI ने बदले थे नियम
SEBI ने अक्टूबर 2023 में 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क को अपडेट किया था। इसके तहत, आउटस्टैंडिंग लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग (Outstanding Long-term Borrowing) की सीमा ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,000 करोड़ कर दी गई थी, जो 1 अप्रैल, 2024 से लागू है। पहले यह नियम ₹100 करोड़ से ज़्यादा के लॉन्ग-टर्म डेट और 'AA' रेटिंग वाली लिस्टेड कंपनियों पर लागू होता था।
शून्य डेट (NIL Debt) रिपोर्ट करने के कारण, Rajdarshan Industries इन बोर्रोइंग थ्रेशोल्ड (Borrowing Thresholds) से काफी नीचे है। इससे कंपनी को रेगुलेटरी सर्टेनिटी (Regulatory Certainty) मिलती है और कंप्लायंस ऑब्लिगेशन्स (Compliance Obligations) आसान हो जाते हैं। मैनेजमेंट अब LC फंडरेजिंग रूल्स की संभावित जटिलताओं के बिना अपने कोर बिजनेस पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।
यह कन्फर्मेशन दूसरी लिस्टेड कंपनियों के ट्रेंड को भी फॉलो करती है। हाल ही में United Polyfab Gujarat Ltd. और B. L. Kashyap and Sons Ltd. जैसी कंपनियों ने भी यह बताया है कि वे SEBI की खास बोर्रोइंग या रेटिंग क्राइटेरिया को पूरा नहीं करती हैं।
