राज रेयॉन के FY26 नतीजे: मुनाफे में दमदार उछाल
Raj Rayon Industries ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने पिछले साल के मुकाबले अपने नेट प्रॉफिट (Profit After Tax - PAT) में 146% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है, जो अब ₹34 करोड़ पर पहुंच गया है। इस शानदार प्रदर्शन का मुख्य कारण कुल आय (Total Income) में 40% का इजाफा है, जो पिछले साल के ₹854.13 करोड़ से बढ़कर ₹1,184.62 करोड़ हो गया है।
FY26 की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे भी दमदार रहे, जिसमें आय ₹294.82 करोड़ और PAT ₹14.03 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले काफी बेहतर है।
ऑडिटर की चिंता बरकरार: तीसरी बार 'क्वालिफाइड ओपिनियन'
हालांकि, इन दमदार नतीजों के बीच एक बड़ी चिंता बनी हुई है। कंपनी के वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditors), M/s. V. S. Gokhale & Co., ने लगातार तीसरी बार अपने ऑडिट रिपोर्ट में एक 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) दिया है। यह चिंता the 'इनऑपरेटिव बैंक अकाउंट्स' (inoperative bank accounts) से जुड़ी है, जिसका प्रभाव कितना है, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह कंपनी के कंप्लायंस (Compliance) या प्रोसीजरल चुनौतियों की ओर इशारा करता है।
मैनेजमेंट में बदलाव और बिजनेस
इसके अलावा, कंपनी ने अपने कॉर्पोरेट लीडरशिप में भी बदलाव की घोषणा की है। 14 मई 2026 को कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर श्री चिन्तन धारोद (Chintan Dharod) ने इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह 15 मई 2026 से सुश्री रितु शुक्ला (Ritu Shukla) को नियुक्त किया गया है, जो रेगुलेटरी कंप्लायंस की देखरेख करेंगी।
Raj Rayon Industries सिंथेटिक टेक्सटाइल सेक्टर में काम करती है, जो पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न (PFY) और पॉलिएस्टर स्टेपल फाइबर (PSF) जैसे उत्पादों का निर्माण करती है। यह सेक्टर Reliance Industries Ltd. और Indorama Synthetics (India) Ltd. जैसे बड़े प्लेयर्स के साथ प्रतिस्पर्धी है।
प्रमुख वित्तीय आंकड़े
31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार:
- स्टैंडअलोन नेट वर्थ: ₹156.47 करोड़
- स्टैंडअलोन बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) FY26: ₹0.61
- स्टैंडअलोन क्वालिफाइड बॉरोइंग्स: ₹173.52 करोड़
पिछले वर्ष की तुलना में:
- स्टैंडअलोन कुल आय FY25: ₹854.13 करोड़
- स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स FY25: ₹13.81 करोड़
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों की नज़रें अब इस बात पर होंगी कि कंपनी ऑडिटर द्वारा उठाए गए इनऑपरेटिव बैंक अकाउंट्स के मुद्दे को कितनी जल्दी सुलझाती है। साथ ही, नए कंपनी सेक्रेटरी का कामकाज और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर उनका प्रभाव भी अहम रहेगा।
