Rachit Prints के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि अब उन्हें Related Party Transaction (RPT) के कड़े नियमों का पालन नहीं करना पड़ेगा। SEBI ने कंपनी को वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक इस नियम से मुक्त रखा है। यह छूट कंपनी के ₹10 करोड़ से कम पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल (Paid-up Equity Share Capital) और ₹25 करोड़ से कम नेट वर्थ (Net Worth) के कारण मिली है। वित्तीय वर्ष 2024-25 तक कंपनी का पेड-अप कैपिटल लगभग ₹3.63 करोड़ और नेट वर्थ करीब ₹12.31 करोड़ था, जो SEBI की निर्धारित सीमाओं के भीतर है।
इस एग्जेंप्शन (Exemption) का सीधा मतलब है कि Rachit Prints को अब संबंधित पक्षों के साथ होने वाले हर ट्रांजेक्शन (Transaction) के लिए ऑडिट कमेटी (Audit Committee) या शेयरहोल्डर्स (Shareholders) से मंजूरी लेने और अतिरिक्त डिस्क्लोजर (Disclosure) देने की जरूरत नहीं होगी। इससे कंपनी का एडमिनिस्ट्रेटिव बोझ (Administrative Burden) और खर्च कम होगा।
कंपनी का यह आकार पिछले कुछ सालों से बना हुआ है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में पेड-अप कैपिटल ₹1.91 करोड़ और नेट वर्थ लगभग ₹3.43 करोड़ था। वहीं, वित्तीय वर्ष 2023-24 में पेड-अप कैपिटल ₹1.91 करोड़ पर स्थिर रहा, जबकि नेट वर्थ बढ़कर करीब ₹5.46 करोड़ हो गया था।
मैट्रेस फैब्रिक बनाने वाली यह कंपनी वित्तीय वर्ष 2024-25 में अच्छी ग्रोथ (Growth) भी दिखा रही है। कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) 13% बढ़ा है, जबकि नेट प्रॉफिट (Net Profit) में 125% का शानदार उछाल आया है। SEBI के नियम, विशेषकर लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशन 23, लिस्टेड कंपनियों के लिए RPT की जांच अनिवार्य करते हैं, लेकिन छोटे निकायों को छूट का प्रावधान भी है।
भविष्य में निवेशकों (Investors) को कंपनी के नतीजों पर नजर रखनी होगी, खासकर यह देखने के लिए कि पेड-अप कैपिटल और नेट वर्थ एग्जेंप्शन लिमिट में बने रहते हैं या नहीं। साथ ही, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (Board of Directors) में कोई बदलाव या कंपनी की बड़ी वित्तीय योजनाएं भी अहम हो सकती हैं।
