SEBI द्वारा बनाए गए 'Large Corporate' फ्रेमवर्क के तहत, कुछ चुनिंदा कंपनियों को अपने नए उधार का एक निश्चित हिस्सा डेट सिक्योरिटीज (debt securities) के जरिए ही उठाना अनिवार्य होता है।
RITES Limited, जो मिनिस्ट्री ऑफ रेलवेज़ के अधीन एक प्रतिष्ठित नवरत्न PSU है, ने अपनी सालाना रिपोर्ट पेश करते हुए यह स्पष्ट किया है कि वह फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए इस 'Large Corporate' कैटिगरी में शामिल नहीं है।
इस फैसले का सीधा मतलब है कि RITES को बड़े कॉर्पोरेट्स के लिए अनिवार्य किए गए खास डेट इश्यूएंस (debt issuance) नियमों का पालन नहीं करना पड़ेगा। यह कंपनी को अपनी फाइनेंसिंग स्ट्रैटेजी (financing strategy) में अधिक लचीलापन (flexibility) बनाए रखने की सुविधा देगा।
आमतौर पर, RITES अपनी ग्रोथ और प्रोजेक्ट्स के लिए इंटरनल एक्रूअल्स (internal accruals) और कुशल प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (efficient project execution) पर निर्भर रहती है। कंपनी का उधार (debt) का स्तर अक्सर 'Large Corporate' की सीमा से काफी नीचे रहता है, जिससे उसे यह छूट मिलती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन कंसल्टेंसी सेक्टर में काम करने वाली RITES के साथ IRCON International Ltd, NBCC (India) Ltd, और Rail Vikas Nigam Ltd जैसी कंपनियां भी प्रमुख हैं। हालांकि, हर कंपनी की अपनी फाइनेंसियल संरचना (financial structure) और फाइनेंसिंग प्लान (financing plan) के आधार पर नियमों का पालन अलग-अलग हो सकता है।
शेयरहोल्डर्स (shareholders) के लिए, यह रेग्युलेटरी (regulatory) अपडेट 'बिजनेस एज यूजुअल' (business as usual) जैसी स्थिति बनाए रखता है, जिससे कंपनी अपने स्थापित फाइनेंसिंग तरीकों से आगे बढ़ेगी।
