REC Limited ने पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY26) में ₹16,282.26 करोड़ का रिकॉर्ड स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह कंपनी के इतिहास का सबसे बड़ा सालाना मुनाफा है। वहीं, कंसोलिडेटेड आधार पर भी कंपनी का मुनाफा 2.67% बढ़कर ₹16,308.17 करोड़ और रेवेन्यू 5.66% बढ़कर ₹59,628.35 करोड़ तक पहुंचा।
लेकिन, आखिरी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे। इस तिमाही में REC का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 21.69% घटकर ₹3,375.08 करोड़ रह गया। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में भी 4.98% की कमी आई और यह ₹14,583.39 करोड़ रहा।
जानें क्यों दिख रहा यह अंतर?
यह नतीजे एक बड़ा सवाल खड़े करते हैं - क्यों जहां सालभर कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा, वहीं तिमाही नतीजों में इतनी गिरावट आई? REC के मैनेजमेंट से यह उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द ही होने वाली एनालिस्ट कॉल में इस तिमाही गिरावट के पीछे की वजहों पर रोशनी डालेंगे।
कंपनी का बैकग्राउंड और अहम अपडेट्स:
REC, जो पहले रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन के नाम से जानी जाती थी, भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ़ पावर के तहत एक प्रमुख पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) है। यह एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है और पावर सेक्टर के प्रोजेक्ट्स के लिए लॉन्ग-टर्म लोन मुहैया कराती है।
- डिविडेंड (Dividend): कंपनी ने पूरे साल के लिए ₹18.55 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।
- एसेट क्वालिटी (Asset Quality): REC की एसेट क्वालिटी बेहतरीन बनी हुई है, जिसमें नेट स्टेज-3 लोन (NPA) का स्तर सिर्फ 0.12% है।
- कैपिटलाइजेशन (Capitalization): कंपनी का कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CRAR) 23.11% है, जो इसके वित्तीय स्वास्थ्य को दर्शाता है।
- भविष्य की योजनाएं: REC ने FY27 के लिए ₹1.6 लाख करोड़ के मार्केट बोर्रोइंग प्रोग्राम को हरी झंडी दे दी है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में इसकी भूमिका जारी रहेगी।
संभावित जोखिम (Potential Risks) और आगे क्या देखें:
- तिमाही नतीजों में आई इस बड़ी गिरावट को निवेशक बारीकी से देखेंगे।
- हाल ही में NSE और BSE ने बोर्ड कंपोजीशन नियमों के अनुपालन में देरी के लिए कंपनी पर ₹10.86 लाख का जुर्माना लगाया था।
- REC की पेरेंट कंपनी Power Finance Corporation (PFC) ने Q3 FY26 में ₹6,292.46 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट और 8.64% की रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई थी, जो REC के नतीजों से अलग है।
- आगे चलकर निवेशक मैनेजमेंट की कमेंट्री, FY27 के लिए गाइडेंस, और बोर्रोइंग प्रोग्राम के इस्तेमाल पर नजर रखेंगे।
