गवर्नेंस और ऑपरेशन्स को मजबूत करने की तैयारी
बोर्ड ने कंपनी की कई महत्वपूर्ण नीतियों (policies) में भी बदलाव को मंजूरी दी है। इनमें इनसाइडर ट्रेडिंग (insider trading), व्हिसलब्लोइंग (whistleblowing) और डेटा प्राइवेसी (data privacy) से जुड़ी नीतियां शामिल हैं। इन बदलावों का मकसद कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) को और मजबूत करना है।
एक और बड़ा फैसला यह लिया गया है कि अब कंपनी के सभी खाते-बही (books of accounts) और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स (financial statements) कंपनी के कॉर्पोरेट ऑफिस, बद्दी, हिमाचल प्रदेश में रखे जाएंगे। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है, जिससे वित्तीय रिकॉर्ड रखने का काम कंपनी के ऑपरेशनल हब में सेंट्रलाइज्ड हो जाएगा।
CIRP के बाद कंपनी का नया कदम
ये फैसले कंपनी के कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से बाहर आने के बाद उसके ऑपरेशनल और गवर्नेंस ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम माने जा रहे हैं। नए ऑडिटर की नियुक्ति और नीतियों में सुधार से वित्तीय पारदर्शिता (financial transparency) और रेगुलेटरी कंप्लायंस (regulatory compliance) सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
यह ध्यान देने योग्य है कि RCI Industries एंड टेक्नोलॉजीज को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा JTL इंडस्ट्रीज के रेज़ोल्यूशन प्लान के आधार पर CIRP से मंजूरी मिली थी। पहले कंपनी पर फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के आरोप लगे थे और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) व एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) जैसी एजेंसियों की जांच भी हुई थी। कंपनी के बोर्ड में जनवरी 2026 में बड़ा फेरबदल हुआ था, जिसमें ध्रुव सिंघल को चेयरमैन (Chairman) नियुक्त किया गया था।
आगे की राह और निवेशकों की नजर
इन सुधारों के बावजूद, RCI Industries को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी का बैलेंस शीट (balance sheet) कमजोर है और प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) नकारात्मक बनी हुई है। ऐसे में, नए ऑडिट टीम की प्रभावशीलता, अपडेटेड नीतियों का कार्यान्वयन और बद्दी ऑफिस में खातों के सेंट्रलाइजेशन से ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कंप्लायंस पर पड़ने वाले असर पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी। कंपनी मेटल्स और कॉपर प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम करती है, जहां इसके पीयर्स (peers) में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, माधव कॉपर लिमिटेड और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
