FY26 में दमदार परफॉरमेंस
Quess Corp Ltd ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की कन्सॉलिडेटेड टोटल इनकम में 2.21% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो ₹15,321.68 करोड़ रही। लेकिन असली कहानी नेट प्रॉफिट की है, जिसमें 384% का ज़बरदस्त उछाल देखा गया और यह ₹222.20 करोड़ तक पहुँच गया। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह आंकड़ा केवल ₹45.89 करोड़ था।
Q4 में शानदार वापसी
सबसे बड़ी राहत और खुशी चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों से मिली है। इस तिमाही में कंपनी ने ₹64.35 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है। यह एक महत्वपूर्ण वापसी है, क्योंकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को ₹95.45 करोड़ का भारी घाटा हुआ था। Q4 में कन्सॉलिडेटेड टोटल इनकम भी 6.31% बढ़कर ₹3,898.64 करोड़ दर्ज की गई।
स्टैंडअलोन नतीजे और डिविडेंड का ऐलान
स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों में भी कंपनी ने तगड़ा टर्नअराउंड दिखाया है। FY26 में ₹189.12 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में घाटा था। Q4 FY26 में स्टैंडअलोन प्रॉफिट ₹58.77 करोड़ रहा। इस सकारात्मक वित्तीय प्रदर्शन के साथ, कंपनी ने शेयरहोल्डर्स को तोहफा देते हुए ₹6 प्रति शेयर का डिविडेंड भी घोषित किया है।
अनसुलझे ऑडिट और टैक्स मुद्दे
हालांकि, कंपनी के लिए कुछ चुनौतियाँ अभी भी बाकी हैं। कंपनी के ऑडिटर बार-बार अपनी रिपोर्ट में कुछ मॉडिफाइड ओपिनियन (modified opinion) दे रहे हैं। यह मुख्य रूप से दो वजहों से है: सेक्शन 80JJAA के तहत हुए डिसअलॉएंसेज (disallowances) और गुडविल पर लगे डेप्रिसिएशन (depreciation on goodwill) से जुड़े टैक्स विवाद। इन मामलों के चलते कंपनी पर ₹387.99 करोड़ की एक बड़ी कंटिंजेंट टैक्स लायबिलिटी (contingent tax liability) भी बनी हुई है। मैनेजमेंट को इन पुराने टैक्स मामलों को जल्द सुलझाने की दिशा में काम करना होगा ताकि भविष्य में ऑडिट रिपोर्ट्स क्लीन आ सकें।
इंडस्ट्री पीयर्स से तुलना
रेवेन्यू ग्रोथ की बात करें तो Quess Corp का 2.21% का इजाफा कुछ इंडस्ट्री पीयर्स की तुलना में कम है। उदाहरण के लिए, TeamLease Services ने Q2 FY26 में 8.4% और Info Edge (India) Ltd ने Q3 FY26 में 8.13% की ईयर-ऑन-ईयर रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की थी। हालांकि, Quess Corp की Q4 FY26 में घाटे से प्रॉफिट में आई बड़ी वापसी इसे अलग बनाती है।
निवेशकों के लिए अहम फोकस एरिया
निवेशकों की नज़रें अब कंपनी द्वारा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ चल रहे टैक्स विवादों को सुलझाने के प्रयासों पर रहेंगी। आने वाली ऑडिट रिपोर्ट्स यह बताएंगी कि क्या ये मॉडिफिकेशन्स जारी रहती हैं या कंपनी इन पर काबू पा लेती है। साथ ही, कंपनी अपनी प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने और रेवेन्यू ग्रोथ को कैसे बढ़ाती है, यह भी देखना अहम होगा।
