टैक्स डिमांड पर Prism Johnson का रुख
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह इस टैक्स डिमांड को मानने वाली नहीं है। Prism Johnson के अनुसार, यह डिमांड इनकम टैक्स अधिकारियों द्वारा कुछ खर्चों की कटौती (Disallowance of expenses) को स्वीकार न करने के कारण आई है। कंपनी इस फैसले को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार है और इसके खिलाफ अपील फाइल करने की योजना बना रही है।
कंपनी को क्या है उम्मीद?
हालांकि कंपनी इस डिमांड को गलत ठहरा रही है, फिर भी Prism Johnson का कहना है कि फिलहाल इस डिमांड का उसके फाइनेंशियल या ऑपरेशंस पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। लेकिन, अगर अपील सफल नहीं होती है, तो भविष्य में इसके फाइनेंशियल हेल्थ पर असर पड़ सकता है।
टैक्स विवादों का पुराना इतिहास
यह Prism Johnson के लिए पहली बार नहीं है जब उसे टैक्स संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जनवरी 2025 में, कंपनी ने ₹34.10 करोड़ के एक टैक्स डिमांड मामले में CESTAT से अपने पक्ष में फैसला हासिल किया था, हालांकि इनकम टैक्स विभाग ने इसे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इसके अलावा, मार्च 2026 में, कंपनी को 2013 के Cenvat क्रेडिट से संबंधित ₹87.46 लाख का पेनल्टी ऑर्डर भी मिला था, जिसे भी कंपनी अपील करने की योजना बना रही है। पिछले साल 2025 के अंत में, इनकम टैक्स सर्वे ने भी कंपनी की कुछ यूनिट्स का दौरा किया था, जिससे बोर्ड मीटिंग्स के शेड्यूल पर भी कुछ समय के लिए असर पड़ा था।
आगे क्या?
कंपनी अब इस टैक्स असेसमेंट के खिलाफ औपचारिक कानूनी कार्यवाही शुरू कर रही है। इस मामले में मुख्य जोखिम अपील के नतीजे पर टिका है, जहाँ एक प्रतिकूल फैसला कंपनी के लिए आर्थिक बोझ बन सकता है। यह नया डिमांड कंपनी के टैक्स और कानूनी मामलों पर चल रही जांच में एक और कड़ी जोड़ता है। शेयरधारकों को कंपनी की अपील की प्रगति पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
इंडस्ट्री का माहौल
भारत के बिल्डिंग मैटेरियल्स सेक्टर में UltraTech Cement, ACC Limited, Ambuja Cements और Shree Cements जैसी बड़ी कंपनियां भी रेगुलेटरी माहौल में काम करती हैं और उन्हें भी इसी तरह की टैक्स स्क्रूटनी का सामना करना पड़ सकता है। ये कंपनियां सीधे तौर पर इस ऑर्डर में शामिल नहीं हैं, लेकिन इंडस्ट्री में टैक्स और रेगुलेटरी कंप्लायंस एक आम बात है।
