Precision Wires India Limited के लिए एक बड़ी खबर आई है। कंपनी ने गुजरात स्थित अपने Valvada प्लांट में कॉपर रॉड (Copper Rod) का कमर्शियल प्रोडक्शन (Commercial Production) शुरू कर दिया है। इस प्लांट को हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का सर्टिफिकेशन मिला है, जो खास तौर पर इलेक्ट्रिकल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल होने वाले कॉपर वायर रॉड के लिए होता है। यह सर्टिफिकेशन 18 मार्च, 2026 को मिला और इसके ठीक बाद, 26 मार्च, 2026 को प्रोडक्शन शुरू हो गया।
यह कदम कंपनी की बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। इसका मतलब है कि अब कंपनी अपने एक जरूरी कच्चे माल, यानी कॉपर रॉड, का उत्पादन खुद करेगी। इससे न केवल कंपनी की सप्लाई चेन (Supply Chain) और मजबूत होगी, बल्कि वायर बनाने के अपने मुख्य काम के लिए इनपुट कॉस्ट (Input Cost) को कम करने में भी मदद मिलेगी।
Valvada प्लांट से शुरू हुआ यह प्रोडक्शन, कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता में इजाफा करेगा। कंपनी की वाइंडिंग वायर (Winding Wire) के लिए कुल क्षमता लगभग 48,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) है, और आगे विस्तार की भी योजनाएं हैं। इस Valvada प्लांट के लिए कंपनी ने ₹5 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) भी मंजूर किया था।
Valvada प्लांट से निकलने वाले कॉपर रॉड का मुख्य इस्तेमाल कंपनी अपने वाइंडिंग वायर प्रोडक्ट्स (Winding Wire Products) में ही करेगी। इस तरह, कंपनी बाहरी सप्लायर्स पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगी और कॉस्ट मैनेजमेंट (Cost Management) को बेहतर बना सकेगी।
भारत में कॉपर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में Sterlite Copper (Vedanta Ltd), Hindustan Copper Limited (HCL), और Hindalco Industries (Birla Copper) जैसे बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं। हालांकि, Precision Wires India की रणनीति अपने स्पेशलाइज्ड वाइंडिंग वायर प्रोडक्ट्स के लिए कैप्टिव कंजम्पशन (Captive Consumption) पर केंद्रित है।
अब निवेशकों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि Valvada प्लांट में प्रोडक्शन कितनी तेजी से बढ़ता है और इसका यूटिलाइजेशन रेट (Utilization Rate) क्या रहता है। कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर कैप्टिव कॉपर रॉड प्रोडक्शन का कितना असर पड़ता है, इनपुट कॉस्ट में क्या बदलाव आता है, और भविष्य में कंपनी की क्या विस्तार योजनाएं हैं, ये सभी प्रमुख बातें होंगी जिन पर गौर किया जाएगा।