सुखदेव सिंह बने PTC India के नए चेयरमैन, पर लगानी होगी मुहर
PTC India लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 16 अप्रैल, 2026 को हुई एक अहम बैठक में सुखदेव सिंह को कंपनी का नया नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाने का फैसला लिया है। सुखदेव सिंह फिलहाल कंपनी के एक स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
इस नियुक्ति को अंतिम रूप देने के लिए चार प्रमोटर कंपनियों के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर्स (CMDs) से औपचारिक मंजूरी मिलना बाकी है। यह नियुक्ति 10 नवंबर, 2028 तक प्रभावी रहेगी।
क्यों हो रहा है ये बड़ा बदलाव?
यह फैसला कंपनी की बड़े स्ट्रक्चरिंग (Restructuring) का हिस्सा है, जिसका मकसद चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) के संयुक्त पद को दो अलग-अलग पदों में बांटना है। पहले 14 फरवरी, 2026 को बोर्ड ने इस भूमिका के बंटवारे को मंजूरी दी थी। सुखदेव सिंह को पहली बार 11 नवंबर, 2025 को एक स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था।
गवर्नेंस और स्ट्रैटेजी में सुधार का इरादा
नेतृत्व कार्यों को अलग करने से कंपनी का कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) और मजबूत होगा। यह सरकार के निर्देश पर हो रहे व्यापक पुनर्गठन का भी एक हिस्सा है, जिसका लक्ष्य PTC India में स्वामित्व को consolidate करना और प्रबंधन को सुव्यवस्थित करना है।
इस कदम से भविष्य में रणनीतिक फैसलों और परिचालन दक्षता में सुधार की उम्मीद है।
रीस्ट्रक्चरिंग के पीछे कौन?
PTC India, जो 1999 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत शुरू हुई थी, अब पावर मिनिस्ट्री (Ministry of Power) के निर्देश पर बड़े बदलाव कर रही है। NTPC लिमिटेड कंपनी का एकमात्र प्रमोटर बनने जा रही है, जो पहले के कंसोर्टियम (Power Finance Corporation, Power Grid Corporation of India, और NHPC Limited) की जगह लेगा।
इस बड़े रीस्ट्रक्चरिंग के तहत, मौजूदा संयुक्त CMD पद को विभाजित किया जा रहा है। अनुभवी रिटायर्ड IAS अधिकारी सुखदेव सिंह, जो नवंबर 2025 से स्वतंत्र निदेशक हैं, अब नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका संभालेंगे। कंपनी के मौजूदा CMD, डॉ. मनोज कुमार झावर (Dr. Manoj Kumar Jhawar), नई संरचना में मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) के तौर पर काम करेंगे।
मुख्य बदलावों में शामिल हैं:
- स्पष्ट नेतृत्व: चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के अलग-अलग पद होने से एग्जीक्यूटिव और नॉन-एग्जीक्यूटिव निरीक्षण के लिए स्पष्टता आएगी।
- सरल स्वामित्व: NTPC के एकमात्र प्रमोटर बनने से संरचना सरल होगी।
- गवर्नेंस पर जोर: सुखदेव सिंह जैसे अनुभवी पूर्व अधिकारी की नियुक्ति से कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूती मिलेगी।
- भूमिका का बंटवारा: लीडरशिप पदों का औपचारिक बंटवारा तुरंत लागू होगा।
संभावित बाधाएं:
- प्रमोटर की मंजूरी: नियुक्ति की प्रभावशीलता चार प्रमोटर कंपनियों के CMDs से आवश्यक सहमति प्राप्त करने पर निर्भर करती है।
- स्मूथ ट्रांजिशन: नए नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और एग्जीक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर के बीच प्रभावी तालमेल और नए प्रमोटर के सेटअप को एकीकृत करना महत्वपूर्ण होगा।
