शेयरधारकों ने दी इन अहम प्रस्तावों को मंजूरी
कंपनी की 75वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में कुल 18 प्रस्तावों पर शेयरधारकों की मुहर लगी। इन फैसलों में सबसे अहम था कंपनी की उधार लेने की क्षमता को ₹100 करोड़ तक बढ़ाना, यह एक अनसिक्योर्ड लोन लिमिट होगी। साथ ही, कंपनी प्रेफरेंशियल आधार पर नए इक्विटी शेयर भी जारी करेगी। इन कदमों का मकसद कंपनी की फाइनेंशियल पोजीशन और कैपिटल बेस को मजबूत करना है।
प्रमोटर से मिला सहारा, गवर्नेंस में सुधार
बैठक में प्रमोटर, जतिनभाई रमनभाई पटेल, की ओर से ₹100 करोड़ के इंटरेस्ट-फ्री कन्वर्टिबल लोन को भी बोर्ड से मंजूरी मिली थी, जिसे AGM में शेयरधारकों ने हरी झंडी दे दी। इसके अलावा, प्रमोटर से ₹4.80 करोड़ के क्वासी-इक्विटी को शेयरों में बदलने की प्रक्रिया भी पूरी की गई। नए डायरेक्टर्स और ऑडिटर की नियुक्ति के साथ-साथ कंपनी के गवर्निंग डॉक्यूमेंट्स (MoA और AoA) में हुए बदलावों को भी मंजूरी मिली है। यह सब कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है, खासकर कंपनी के पुराने फाइनेंशियल चैलेंजेस को देखते हुए।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि, प्रेफरेंशियल शेयर जारी करने से मौजूदा शेयरधारकों के हिस्से में थोड़ी कमी (डाइल्यूशन) आ सकती है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि PAE Limited ने कभी डिविडेंड का भुगतान नहीं किया है और भविष्य में भी इसकी कोई योजना नहीं है। कंपनी का पिछला रिकॉर्ड खराब रहा है, जिसमें नेगेटिव कैश फ्लो और मुनाफा न के बराबर रहा है।
अहम फाइनेंशियल मेट्रिक्स
आंकड़ों की बात करें तो, 3 अप्रैल 2026 तक कंपनी का ट्रेलिंग बारह महीने का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) -267.21% था, और प्राइस-टू-बुक (P/B) रेश्यो 0.00 था। वहीं, डेट-टू-इक्विटी रेश्यो -1.02 था, जो निगेटिव नेट वर्थ को दर्शाता है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर होगी कि कंपनी ₹100 करोड़ के लोन और प्रेफरेंशियल शेयर जारी करने की प्रक्रिया को कैसे पूरा करती है और इस फंड का इस्तेमाल अपनी परफॉरमेंस को बेहतर बनाने में कैसे करती है।
