घाटे पर कैसे कसी लगाम?
कंपनी के लिए यह एक राहत भरी खबर है क्योंकि यह पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले घाटे को ₹18.07 करोड़ से घटाकर ₹10.94 करोड़ पर ले आई है। इस सुधार के पीछे मुख्य वजह 5.52% की वृद्धि के साथ ₹234.63 करोड़ तक पहुंचा रेवेन्यू रहा।
कर्ज में आई भारी कमी
सबसे खास बात यह है कि Orient Paper ने अपने कर्ज को ₹110 करोड़ से भी ज्यादा कम कर लिया है। कंपनी का कुल कर्ज घटकर ₹286.83 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल ₹397.02 करोड़ था। यह कंपनी के लिए एक बड़ी वित्तीय मजबूती का संकेत है।
इक्विटी में हल्की गिरावट
हालांकि, कंपनी के कुल इक्विटी में थोड़ी गिरावट देखी गई है, जो ₹1,535.08 करोड़ से घटकर ₹1,468.20 करोड़ हो गई है। जानकारों का मानना है कि यह अवधि के नुकसान को कवर करने के लिए पर्याप्त प्रॉफिट न होने का नतीजा हो सकता है। CK Birla Group का हिस्सा Orient Paper मुख्य रूप से राइटिंग और प्रिंटिंग पेपर सेगमेंट में काम करती है और कंपनी पहले ही अपने पैकेजिंग पेपर बिजनेस से बाहर निकल चुकी है।
ऑडिटर्स की क्लीन चिट
कंपनी को अपने ऑडिटर्स से एक अनमॉडिफाइड ओपिनियन (Clean Audit Report) मिला है, जो अच्छी बात है। अब निवेशक भविष्य में लगातार रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी की वापसी का इंतजार करेंगे, साथ ही कर्ज प्रबंधन और इनपुट लागतों पर भी नजर रखेंगे।
