कंपनी के गवर्नेंस में बड़ा बदलाव
Orient Electric Limited के बोर्ड ने हाल ही में हुई अपनी बैठक में Price Waterhouse Chartered Accountants LLP को अगले 5 फाइनेंशियल ईयर के लिए अपना नया स्टैच्यूटरी ऑडिटर बनाने का प्रस्ताव पारित किया है। यह नियुक्ति FY 2026-27 के अंत में होने वाली कंपनी की 10वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) से शुरू होकर FY 2031-32 तक चलने वाली 15वीं AGM तक प्रभावी रहेगी।
कौन कर रहा है बदलाव?
फिलहाल कंपनी के ऑडिटर M/s. S.R. Batliboi & Co. LLP हैं, जो अपनी 5 साल की अवधि पूरी कर रहे हैं। नए ऑडिटर की नियुक्ति इसी क्रम में एक अहम बदलाव है, जिसका मकसद कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट की जांच को और मजबूत करना और निवेशकों का भरोसा बढ़ाना है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
भारत के कंपनी कानून, 2013 के सेक्शन 139 के तहत ऑडिटर की नियुक्ति और रोटेशन (बदलाव) को लेकर नियम तय हैं। इसका मुख्य उद्देश्य ऑडिटर और कंपनी के बीच अत्यधिक नजदीकी को रोकना और समय-समय पर नई ऑडिटर फर्मों द्वारा जांच करवाना है। आम तौर पर, ऑडिटर फर्म 10 साल तक सेवा दे सकती हैं, जिसके बाद एक कूलिंग-ऑफ पीरियड होता है।
क्या कहती हैं ये फर्म्स?
Price Waterhouse Chartered Accountants LLP दुनिया की जानी-मानी PwC नेटवर्क का हिस्सा है और भारत में 17 ऑफिस के साथ एक बड़ा नाम है। S.R. Batliboi & Co. LLP भी एक पुरानी और स्थापित भारतीय ऑडिट फर्म है, जिसका एक सदी से भी लंबा इतिहास रहा है।
आगे क्या?
इस नियुक्ति को अंतिम रूप देने के लिए Orient Electric को अपने शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेनी होगी, जो आगामी AGM में ली जाएगी। दोनों ऑडिटर फर्मों के बीच ऑडिट रिकॉर्ड्स और जानकारी का सुचारू हस्तांतरण एक महत्वपूर्ण कदम होगा, ताकि ऑडिट प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए।