Ambuja Cements के साथ तालमेल का दमदार असर
Orient Cement के फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के नतीजों में Ambuja Cements के अधिग्रहण से हुए तालमेल (synergies) का असर साफ दिख रहा है। कंपनी की आय (revenue from operations) पिछले साल के ₹2,708.83 करोड़ से बढ़कर ₹2,793.12 करोड़ हो गई। इस बढ़ोतरी और Ambuja Cements के साथ बेहतर तालमेल के चलते कंपनी के प्रॉफिट में जबरदस्त उछाल आया है। इस दौरान, बोर्ड ने M/s. P.M. Nanabhoy & Co. को कॉस्ट ऑडिटर और M/s. Grant Thornton Bharat LLP को इंटरनल ऑडिटर के तौर पर भी नियुक्त किया है।
Ambuja Cements के साथ विलय की प्रक्रिया जारी
कंपनी Ambuja Cements के साथ मर्जर (विलय) की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रही है। इस अहम विलय के लिए आवश्यक रेगुलेटरी अप्रूवल का इंतजार है। आपको बता दें कि Orient Cement पहले CK Birla Group का हिस्सा थी, लेकिन अप्रैल 2025 में Adani Group के तहत आने वाली Ambuja Cements ने इसमें प्रमोटर हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था। बोर्ड ने 1 मई, 2025 की अपॉइंटेड डेट के साथ Ambuja Cements के साथ स्कीम ऑफ अमालगामेशन को मंजूरी दे दी है।
शेयरधारकों को डिविडेंड का तोहफा
शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर यह है कि बोर्ड ने ₹0.50 प्रति शेयर के डिविडेंड की सिफारिश की है। यह डिविडेंड एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद ही दिया जाएगा। Ambuja Cements में पूरा एकीकरण (integration) होने से कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को सरल बनाने और Adani Group के तहत ऑपरेशनल एफिशिएंसीज़ को बढ़ाने की उम्मीद है।
अकाउंटिंग बदलावों का असर
FY26 के रिपोर्ट किए गए नतीजों पर कुछ अकाउंटिंग बदलावों का भी असर पड़ा है। डेप्रिसिएशन (मूल्यह्रास) की गणना के लिए उपयोगी जीवन अवधि (useful life) का अनुमान बदलने के कारण FY26 में डेप्रिसिएशन एक्सपेंसेस में ₹63.09 करोड़ की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, टैक्स नियमों में बदलावों ने भी साल-दर-साल तुलना (year-over-year comparability) को प्रभावित किया है। यह प्रस्तावित मर्जर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) सहित विभिन्न वैधानिक और नियामक मंजूरियों पर निर्भर करता है, जिसमें देरी या बदलाव हो सकते हैं।
बाजार में स्थिति और भविष्य का आउटलुक
भारतीय सीमेंट बाजार में UltraTech Cement और Shree Cement जैसी कंपनियां भी मजबूत प्रदर्शन कर रही हैं। हालांकि, Ambuja Cements के तहत Orient Cement का मौजूदा एकीकरण एक अलग रणनीतिक दिशा देता है। भविष्य में, मर्जर के बाद कंसोलिडेटेड परफॉरमेंस की जानकारी मिलेगी। शेयरधारकों को डिविडेंड पर वोटिंग, मर्जर की मंजूरियों की प्रगति और नए लेबर कोड्स के प्रभाव पर नजर रखनी होगी।
