ट्रांसफर प्राइसिंग एडजस्टमेंट बनी मुसीबत
ओरिएंट सीमेंट को असेसमेंट ईयर 2023-24 के लिए इनकम टैक्स विभाग से ₹52.40 करोड़ का एक बड़ा टैक्स नोटिस मिला है। कंपनी का कहना है कि यह डिमांड मुख्य रूप से ₹54.33 करोड़ के ट्रांसफर प्राइसिंग एडजस्टमेंट (Transfer Pricing Adjustment) के कारण आई है, जिसे कंपनी गलत मानती है। इसीलिए, कंपनी इस ऑर्डर को चुनौती देने और इसके खिलाफ अपील करने का इरादा रखती है।
उम्मीद, डिमांड घटेगी ₹3.2 करोड़ तक
कंपनी को उम्मीद है कि अपील और सुधार प्रक्रिया (rectification process) के बाद, टैक्स डिमांड घटकर ₹3.20 करोड़ तक आ जाएगी। ट्रांसफर प्राइसिंग एडजस्टमेंट वह प्रक्रिया है जहाँ टैक्स अथॉरिटीज कंपनियों के बीच होने वाले लेनदेन की जांच करती हैं, और इसमें अक्सर वित्तीय अनिश्चितताएँ पैदा होती हैं। ओरिएंट सीमेंट का मानना है कि मौजूदा ऑर्डर गलत है और वे इसे निपटाने के लिए पूरी कोशिश करेंगे।
पहले भी हो चुका है ऐसा
यह पहली बार नहीं है जब ओरिएंट सीमेंट को इस तरह की टैक्स संबंधी पड़ताल का सामना करना पड़ा है। फरवरी 2025 में, असेसमेंट ईयर 2018-19 के लिए एक रेक्टिफिकेशन ऑर्डर ने ₹24.58 करोड़ की टैक्स डिमांड को घटाकर शून्य कर दिया था। ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विवाद भारत में आम हैं और अक्सर स्वीकार्य पद्धतियों और दस्तावेज़ीकरण पर निर्भर करते हैं।
Q3 FY26 में रहा ₹27.80 करोड़ का मुनाफा
हाल ही में, कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में ₹27.80 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। अब कंपनी अपना पूरा ध्यान इनकम टैक्स अपीलेट अथॉरिटीज के सामने अपना मामला पेश करने पर लगाएगी और इस अपील प्रक्रिया को संभालने के लिए संसाधन आवंटित करेगी।
इंडस्ट्री में आम है ऐसी स्थिति
हालांकि कंपनी को उम्मीद है कि डिमांड काफी कम हो जाएगी, लेकिन अपील का अंतिम नतीजा अभी भी अनिश्चित है। इस सेक्टर में ओरिएंट सीमेंट के साथ-साथ अल्ट्राटेक सीमेंट, श्री सीमेंट, अंबुजा सीमेंट और एसीसी लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियां भी काम करती हैं। इन सभी कंपनियों को भी ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों और टैक्स अथॉरिटीज की कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ता है, जिससे ऐसे विवाद इंडस्ट्री में एक आम बात बन गए हैं।
