Omax Autos ने FY26 में दमदार प्रॉफिट कमाया, ₹2.5 का डिविडेंड घोषित
Omax Autos Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 2 मई 2026 को हुई बैठक में 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने ₹49.46 करोड़ (या ₹4,945.74 लाख) का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) और ₹36.92 करोड़ (या ₹3,691.76 लाख) की टोटल कॉम्प्रिहेंसिव इनकम (TI) दर्ज की है।
शेयरधारकों को मिला डिविडेंड का तोहफा
बोर्ड ने इस दौरान फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY25-26) के लिए ₹2.5 प्रति इक्विटी शेयर (₹10 फेस वैल्यू पर) के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान भी किया है। डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 8 मई 2026 तय की गई है।
नए इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति
इसके साथ ही, कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 (FY26-27) के लिए नए इंटरनल ऑडिटर के तौर पर M/s. T S A Business Advisors Private Limited और Neeraj Madan & Associates की नियुक्ति को भी मंजूरी दी है। ऑडिटर की रिपोर्ट में फाइनेंशियल रिजल्ट्स पर अनमॉडिफाइड ओपिनियन (यानी कोई खास आपत्ति नहीं) मिली है।
क्यों है यह खबर अहम?
अंतरिम डिविडेंड का ऐलान शेयरधारकों को सीधे तौर पर उनके निवेश पर रिटर्न देता है। नए ऑडिटर की नियुक्ति कंपनी के वित्तीय नियंत्रण और अनुपालन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
कंपनी का बैकग्राउंड
Omax Autos ऑटो और नॉन-ऑटो कंपोनेंट्स बनाने वाली एक जानी-मानी कंपनी है, जिसे चार दशकों से ज्यादा का अनुभव है। यह प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माताओं (OEMs) और इंडियन रेलवेज को कंपोनेंट्स सप्लाई करती है। कंपनी का इतिहास डिविडेंड देने का रहा है। पिछले फाइनेंशियल ईयर, यानी 31 मार्च 2025 (FY25) को समाप्त हुए साल में, Omax Autos ने ₹35.32 करोड़ का PBT और ₹21.89 करोड़ की टोटल कॉम्प्रिहेंसिव इनकम दर्ज की थी। FY26 का ₹49.46 करोड़ का PBT, FY25 की तुलना में एक मजबूत साल-दर-साल (Year-on-Year) ग्रोथ दर्शाता है।
आगे क्या उम्मीद करें?
शेयरधारक अब FY2025-26 के लिए घोषित ₹2.5 प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड की उम्मीद कर सकते हैं। नए इंटरनल ऑडिटर FY2026-27 में कंपनी की वित्तीय प्रक्रियाओं और नियंत्रणों की निगरानी शुरू करेंगे। निवेशक डिविडेंड पेमेंट की प्राप्ति पर नजर रखेंगे। Omax Autos का FY 2026-27 में प्रदर्शन और रणनीतिक पहल, नए आंतरिक ऑडिट ढांचे के तहत, महत्वपूर्ण होंगी। ऑटोमोटिव कंपोनेंट इंडस्ट्री में कंपनी की विकास की गति और प्रतिस्पर्धी स्थिति बनाए रखने की क्षमता एक मुख्य फोकस बनी रहेगी।
