कंपनी की नाजुक हालत, अब CFO भी छोड़ रहे पद
OCTL की वित्तीय स्थिति पहले से ही बेहद कमजोर बनी हुई है। कंपनी को लगातार चौथी तिमाही में ₹17.47 करोड़ का भारी घाटा हुआ है। इसके अलावा, 31 मार्च, 2025 तक कंपनी पर ₹10.22 करोड़ का लॉन्ग-टर्म बरोइंग (Long-term Borrowing) यानी बकाया कर्ज भी है।
ऐसे में, एक महत्वपूर्ण पद पर बैठे सीफओ (CFO) का इस्तीफा कंपनी के लिए बड़ी चुनौती है। श्री गुब्बा को कंपनी के कर्ज की स्थिति को लेकर सेबी (SEBI) को डिस्क्लोजर्स (Disclosures) देने में भी अहम भूमिका निभानी थी। उनका जाना, खासकर इस मुश्किल दौर में, कंपनी की वित्तीय रणनीति और रिपोर्टिंग में निरंतरता पर सवाल खड़े करता है। OCTL पहले भी कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) जैसे दौर से गुजर चुकी है।
हालांकि, कंपनी प्रबंधन ने अप्रैल 2026 में मशीनरी विस्तार के लिए ₹6.82 करोड़ का एक टर्म लोन (Term Loan) मंजूर किया है, जो भविष्य की योजनाओं की ओर इशारा करता है।
अब OCTL के बोर्ड के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक नए सीफओ (CFO) की नियुक्ति होगी। कंपनी के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वह इस वित्तीय सुधार और विकास की राह पर स्थिर नेतृत्व बनाए रखे। निवेशक इस बदलाव के कंपनी की वित्तीय योजना और रिपोर्टिंग पर पड़ने वाले असर को लेकर उत्सुक होंगे।
प्रबंधन में खालीपन, लगातार घाटे से निपटने की चुनौती और पिछले CIRP के संभावित असर कंपनी के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं। OCTG (Oil Country Tubular Goods) बाजार में OCTL का मुकाबला Jindal Saw Ltd, Welspun Corp Ltd, और Ratnamani Metals & Tubes Ltd जैसी बड़ी कंपनियों से है। हालांकि ओवरऑल OCTG बाजार बढ़ रहा है, लेकिन OCTL को अपनी आंतरिक वित्तीय मुश्किलों से पार पाना होगा।
