SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' नियम क्या हैं?
SEBI ने 2018 में 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क की शुरुआत की थी, जिसका मकसद भारत के डेट मार्केट को मजबूत करना था। आमतौर पर, किसी लिस्टेड कंपनी (बैंकों को छोड़कर) को 'लार्ज कॉर्पोरेट' तब माना जाता है जब फाइनेंशियल ईयर के अंत में उसके लिस्टेड सिक्योरिटीज हों, ₹100 करोड़ या उससे ज्यादा की लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग (Long-term Borrowing) हो, और उसकी क्रेडिट रेटिंग 'AA' या उससे बेहतर हो। ऐसे बड़े कॉर्पोरेट्स को अपने नए उधार का कम से कम 25% डेट सिक्योरिटीज के जरिए जुटाना अनिवार्य होता है।
NTBCL ने स्पष्ट किया है कि वे इन शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप लगभग ₹65-70 करोड़ के आसपास बताया जा रहा है, जो इसे 'लार्ज कॉर्पोरेट' की परिभाषा से बाहर रखता है।
इस क्लेरिफिकेशन का असर
इस क्लासिफिकेशन के बाद, NTBCL पर SEBI का वोMandate लागू नहीं होगा, जिसके तहत 'लार्ज कॉर्पोरेट्स' को अपने कुल नए उधार का एक चौथाई हिस्सा डेट सिक्योरिटीज के जरिए जुटाना पड़ता है।
- कंपनी को डेट इश्यू (Debt Issue) के लिए SEBI के विशेष डिस्क्लोजर नॉर्म्स (Disclosure Norms) का पालन करने से भी राहत मिलेगी।
- इससे NTBCL को अपने कैपिटल स्ट्रक्चर (Capital Structure) और भविष्य की फंडिंग जरूरतों को मैनेज करने में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) मिलेगी।
बड़े जोखिम अभी भी मौजूद
नियमों में यह राहत मिलने के बावजूद, NTBCL के सामने कई बड़े जोखिम बने हुए हैं। इनमें DND Flyway पर टोल कलेक्शन रोकने वाले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख हैं, जो कंपनी के रेवेन्यू का एक बड़ा जरिया था। कंपनी ने हाल के फाइनेंशियल इयर्स में नेट लॉस (Net Loss) भी दर्ज किया है, जो उसकी वित्तीय सेहत पर सवाल खड़े करता है। इसके अलावा, प्रमोटर होल्डिंग (Promoter Holding) सिर्फ 26.37% है, जो कंपनी की रणनीतिक दिशा पर असर डाल सकती है।
