SFAL Speciality Alloys Limited और Minicraft Enterprise Pvt Ltd ने Nilachal Refractories Limited में अपनी कुल 28,11,986 इक्विटी शेयर बेच दिए हैं। यह हिस्सेदारी कंपनी के कुल वोटिंग कैपिटल का 13.81% है। यह डील 22 अप्रैल 2026 को ऑफ-मार्केट हुई, जिसके बाद SFAL-Minicraft ग्रुप का Nilachal Refractories में कोई भी स्वामित्व नहीं रह गया है।
Nilachal Refractories के मालिकाना हक में यह बड़ा बदलाव है। नए निवेशक की पहचान गुप्त रखे जाने से कंपनी की भविष्य की रणनीति और संभावित कदमों पर अटकलें लगाई जा रही हैं।
Nilachal Refractories Limited, जिसकी स्थापना 1977 में हुई थी, रिफ्रेक्ट्री सेक्टर में काम करती है। यह सेक्टर स्टील और सीमेंट जैसे उद्योगों के लिए जरूरी मैटेरियल सप्लाई करता है। कंपनी को 2005 में मैनेजमेंट टेकओवर जैसी कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए, कंपनी ने ₹4.85 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹22.02 करोड़ के लॉस से बेहतर है। हालांकि, ऑडिटर्स ने FY26 के लिए अपनी रिपोर्ट में कुछ चिंताओं पर सवाल उठाए हैं, जैसे कि अनरिडीम्ड प्रेफरेंस शेयर और कर्मचारियों के लाभ के लिए एक्टुरियल वैल्यूएशन की कमी।
इस ऑफ-मार्केट बिक्री में खरीदार की पहचान का पता न चलना एक बड़ा जोखिम है, जिससे उनके इरादों का आकलन करना मुश्किल हो रहा है। डील से जुड़ी वित्तीय जानकारी का भी अभाव है। कंपनी लगातार वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही है, और ऑडिटर्स ने लगातार घाटे और नेगेटिव नेट वर्थ के कारण 'गोइंग कंसर्न' (चलते रहने की क्षमता) को लेकर चिंता जताई है।
Nilachal Refractories भारतीय रिफ्रेक्ट्री मार्केट में बड़े खिलाड़ियों के बीच काम करती है। इसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी RHI Magnesita India का मार्केट कैप करीब ₹13,316 करोड़ और Vesuvius India का करीब ₹8,913 करोड़ है, जो Nilachal के लगभग ₹108.63 करोड़ के मार्केट कैप से कहीं ज्यादा है।
निवेशक अब इस बात पर नज़र रखेंगे कि 13.81% हिस्सेदारी का असली मालिक कौन है। कंपनी के भविष्य के शेयरहोल्डिंग पैटर्न और वित्तीय स्थिति में सुधार पर भी पैनी नज़र रखनी होगी।
