यह अहम फैसला सोमवार, 18 मई, 2026 को कोलकाता में हुई एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में लिया गया। शेयरधारकों ने दो मुख्य प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी: पहला, कंपनी के अंडरटेकिंग (यानी, उसका एक बड़ा बिज़नेस हिस्सा) की संभावित बिक्री, ट्रांसफर या निपटान, और दूसरा, एक महत्वपूर्ण 'रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन' को हरी झंडी दिखाना। इस ईजीएम के लिए 15 से 17 मई, 2026 तक रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा भी दी गई थी, और कंपनी ने SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015, और Companies Act, 2013 के तहत सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया।
यह अंडरटेकिंग बेचने का अप्रूवल एक बड़ा स्ट्रेटेजिक कदम माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि Nilachal Refractories अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव लाने या रिस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) करने की ओर बढ़ रही है। कंपनी पहले भी कई फाइनेंशियल मुश्किलों से गुजरी है और कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दौर से भी, जिसे 2022-2023 के आसपास नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में स्वीकार किया गया था।
निवेशक अब इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि यह डील कितनी पारदर्शी है और इसके पीछे कंपनी की क्या स्ट्रेटेजिक योजनाएं हैं। सबसे अहम यह देखना होगा कि 'रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन' आर्म्स लेंथ (Arm's Length) पर हो और कंपनी के दीर्घकालिक हितों के लिए फायदेमंद साबित हो। कंपनी फिलहाल स्क्रूटिनाइजर (Scrutinizer) द्वारा घोषित किए जाने वाले कंसॉलिडेटेड ई-वोटिंग और पोल वोटिंग के नतीजों का इंतजार कर रही है। इसके बाद, अंडरटेकिंग की बिक्री और 'रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन' की विस्तृत शर्तों का खुलासा होने की उम्मीद है।
Nilachal Refractories रिफ्रेक्ट्रीज सेक्टर (Refractories Sector) में काम करती है, जो स्टील और सीमेंट जैसे भारी उद्योगों के लिए हाई-टेंपरेचर मैटेरियल सप्लाई करता है। इस सेक्टर में Dalmia Refractories Ltd. और IFGL Refractories Ltd. जैसी कंपनियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।