कंसॉलिडेटेड मोर्चे पर दमदार परफॉरमेंस
कंपनी की कंसॉलिडेटेड परफॉरमेंस शानदार रही। Q4 FY26 में, Nila Spaces ने ₹52.46 करोड़ का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू और ₹9.40 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में 37.11% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹197.96 करोड़ रहा, और कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट ₹28.76 करोड़ पर पहुंच गया। Q4 में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 25.26% बढ़ा।
स्टैंडअलोन ऑपरेशंस में मिले-जुले संकेत
हालांकि, कंपनी के स्टैंडअलोन ऑपरेशंस कुछ मिले-जुले रुझान दिखा रहे हैं। स्टैंडअलोन एनुअल इनकम 21.49% बढ़कर ₹175.35 करोड़ हुई, और ₹26.61 करोड़ का स्टैंडअलोन प्रॉफिट दर्ज किया गया। लेकिन, Q4 FY26 के लिए स्टैंडअलोन क्वार्टरली इनकम ₹41.51 करोड़ रही, जो पिछले साल की इसी तिमाही से 0.80% कम है। यह दर्शाता है कि कंपनी के कोर स्टैंडअलोन बिजनेस में फिलहाल कुछ चुनौतियां हैं।
डेट में चिंताजनक उछाल
सबसे बड़ी चिंता स्टैंडअलोन नॉन-करंट बोर्रोइंग्स (कर्ज़) में हुई भारी बढ़ोतरी को लेकर है। मार्च 2025 में यह सिर्फ ₹3.32 लाख था, लेकिन मार्च 2026 तक यह बढ़कर ₹5,422.62 लाख यानी करीब ₹54.23 करोड़ हो गया। यह एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी है जिस पर निवेशकों की पैनी नज़र रहेगी।
ऑडिटर की क्लीन रिपोर्ट और आगे की राह
राहत की बात यह है कि कंपनी के स्टेटुटरी ऑडिटर ने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर एक क्लीन ऑडिट रिपोर्ट दी है, जिसका अर्थ है कि अकाउंटिंग में कोई गंभीर समस्या नहीं है। Nila Spaces, जो दिसंबर 2022 में NSE Emerge पर IPO के जरिए पब्लिक हुई थी, ग्रेड A वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करती है। कंपनी की ग्रोथ में कर्ज़ और इक्विटी दोनों का योगदान रहा है।
निवेशकों को अब कंपनी के मैनेजमेंट द्वारा इस बढ़े हुए कर्ज़ को मैनेज करने की रणनीति, चल रहे और भविष्य की प्रोजेक्ट्स, और स्टैंडअलोन क्वार्टरली रेवेन्यू के प्रदर्शन पर कड़ी नज़र रखनी होगी। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर में, Nila Spaces का मुकाबला Allcargo Logistics और Mahindra Logistics जैसी कंपनियों से है, जो अपनी क्षमता विस्तार और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर लगातार काम कर रही हैं।
