₹500 करोड़ के सौदों पर शेयरधारकों की मंजूरी
Nila Infrastructures Ltd ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए अपनी कनेक्टेड कंपनियों के साथ होने वाले ₹500 करोड़ के सौदों पर शेयरधारकों की मुहर लगवाने का फैसला किया है। कंपनी ने इसके लिए पोस्टल बैलेट प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इन प्रस्तावित सौदों में सबसे बड़ा हिस्सा कॉरपोरेट गारंटी का है, जो ₹175 करोड़ तक जा सकता है। इसके अलावा, कंपनी निर्माण और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन के लिए ₹100 करोड़, दिए जाने वाले लोन के लिए ₹150 करोड़, और जमीन या प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री के लिए ₹75 करोड़ के सौदे कर सकती है।
ये सभी ट्रांजैक्शन्स (Transactions) कंपनी से जुड़ी कई संस्थाओं के साथ होंगी। इनमें Romanovia Industrial Park Pvt. Ltd., Kent Residential & Industrial Park LLP, Vyapnila Terminal (Modasa) Pvt. Ltd., Nila Spaces Ltd. और प्रमोटर मिस्टर मनोज बी. वडोदरिया (Mr. Manoj B. Vadodaria) अपने रिश्तेदारों के साथ शामिल हैं।
जिन शेयरधारकों का नाम 3 अप्रैल, 2026 तक कंपनी के रिकॉर्ड में था, वे इस वोटिंग में हिस्सा ले सकते हैं। ई-वोटिंग की अवधि 11 अप्रैल, 2026 से शुरू होकर 10 मई, 2026 तक चलेगी। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में ऐसे ही सौदों का मूल्य ₹48.92 करोड़ था, जबकि अप्रैल से दिसंबर 2025 तक यह ₹35.44 करोड़ रहा था।
इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर में, जहां प्रोजेक्ट्स के लिए अक्सर संबंधित संस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता है, ऐसे कनेक्टेड पार्टी ट्रांजैक्शन्स काफी आम होते हैं। शेयरधारकों से मंजूरी मांगकर Nila Infra कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा रही है।
यह शेयरहोल्डर अप्रूवल Nila Infrastructures के लिए FY 2026-27 की योजनाओं को आगे बढ़ाने और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन के लिए बेहद अहम है। इससे कंपनी मौजूदा संसाधनों और संबंधों का बेहतर इस्तेमाल कर सकेगी।
SEBI के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशंस, 2015 के तहत, लिस्टेड कंपनियों को संबंधित पार्टियों के साथ बड़े ट्रांजैक्शन्स के लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे सौदे निष्पक्ष हों और माइनॉरिटी शेयरधारकों को नुकसान न हो।
अगर शेयरधारक मंजूरी दे देते हैं, तो Nila Infra इन सौदों को औपचारिक रूप दे सकेगी। वहीं, अगर बहुमत वोट नहीं मिला, तो कंपनी को सौदों की शर्तों पर फिर से बातचीत करनी पड़ सकती है या वैकल्पिक रास्ते खोजने होंगे।
