उत्पादन पर अस्थायी रोक, पावर बिक्री पर फोकस
Nava Limited ने अपने ओडिशा फेरो एलॉयज प्लांट में मौजूद दो फर्नेस के संचालन को 1 अप्रैल 2026 से लगभग तीन महीने के लिए रोक दिया है। इसका मुख्य कारण इन पुरानी एसेट्स (assets) पर जरूरी मेंटेनेंस (maintenance) और स्ट्रक्चरल इंस्पेक्शन (structural inspection) है। इनमें से कुछ फर्नेस 25 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं और उन्हें मिड-लाइफ रिपेयर (mid-life repair) की जरूरत है।
हालांकि, फेरो एलॉय उत्पादन पर असर पड़ेगा, लेकिन कंपनी का 30 MW का कैप्टिव पावर प्लांट (Captive Power Plant) पूरी क्षमता से चलता रहेगा। कंपनी ग्रिड को बिजली बेचकर रेवेन्यू (revenue) जेनरेट करेगी, जिससे इस अस्थायी शटडाउन (shutdown) से होने वाले वित्तीय नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। Nava Limited का इतिहास रहा है कि वह अपने कैप्टिव पावर प्लांट से अतिरिक्त बिजली राष्ट्रीय ग्रिड को बेचती रही है।
निवेशक क्या ध्यान रखें?
निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि फाइनेंशियल ईयर 24 (FY24) में कच्चे माल की हैंडलिंग सिस्टम में खराबी के कारण प्लांट पांच महीने तक बंद रहा था, जिससे फेरो एलॉय सेगमेंट को नुकसान हुआ था। साथ ही, ओपन मार्केट (merchant power) में बिजली की बिक्री कीमतों में उतार-चढ़ाव और पावर परचेज एग्रीमेंट (PPAs) की कमी के कारण मुश्किलों का सामना कर सकती है। हाल ही में, Q3 FY25-26 में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 12.2% सालाना आधार पर गिरा है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
इंडस्ट्री की स्थिति
फेरो एलॉय सेक्टर में Nava Limited का मुकाबला Indian Metals & Ferro Alloys Ltd (IMFA) और Maithan Alloys Ltd जैसी कंपनियों से है, जो लागत नियंत्रण के लिए कैप्टिव पावर का इस्तेमाल करती हैं। बड़े पावर प्रोड्यूसर NTPC और Adani Power जैसे खिलाड़ी हैं, लेकिन Nava की रणनीति अपने कैप्टिव पावर पर निर्भर करती है।
आगे क्या देखें?
आगे चलकर, निवेशक मेंटेनेंस पूरा होने और फेरो एलॉय उत्पादन फिर से शुरू होने की जानकारी पर नजर रखेंगे। इस दौरान पावर बिक्री से होने वाली कमाई और उत्पादन शुरू होने के बाद अपेक्षित आउटपुट (output) पर कंपनी के मैनेजमेंट की कमेंट्री अहम होगी।
