कंपनी के बोर्ड का बड़ा फैसला
नेशनल ऑक्सीजन लिमिटेड ने अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में यह अहम फैसला लिया है। कंपनी 9,50,000 इक्विटी शेयर तक जारी करेगी, जिनकी फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर होगी। ये शेयर सीधे प्रमोटर ग्रुप की कंपनी Saraf Housing Development Private Limited को दिए जाएंगे। इस प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) के जरिए कंपनी कैपिटल जुटाने की योजना बना रही है, जिससे प्रमोटर की हिस्सेदारी मजबूत हो सकती है। SEBI के नियमों का पालन करते हुए, शेयर जारी करने की कीमत तय करने के लिए एक रजिस्टर्ड वैल्युअर (Registered Valuer) की नियुक्ति भी कर दी गई है।
यह फैसला क्यों है अहम?
यह अलॉटमेंट नेशनल ऑक्सीजन के लिए कैपिटल जुटाने का एक जरिया है, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है। साथ ही, इसका एक मकसद प्रमोटर ग्रुप की शेयरहोल्डिंग को और मजबूत करना भी है, जिससे उनका कंपनी पर नियंत्रण बढ़ सकता है। पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए यह कदम या तो एक सकारात्मक कैपिटल इंजेक्शन के तौर पर देखा जा सकता है, या फिर अगर शेयर बाजार भाव से काफी कम कीमत पर जारी किए जाते हैं तो उनकी हिस्सेदारी कम (Dilution) भी हो सकती है।
पिछले इश्यू और प्रमोटर की हिस्सेदारी
इंडस्ट्रियल गैस बनाने वाली नेशनल ऑक्सीजन ने पहले भी अपने प्रमोटर्स को प्रेफरेंशियल शेयर इश्यू किए हैं। अप्रैल 2024 में, प्रमोटर को ₹120 के प्रीमियम पर जारी किए गए 2,40,114 इक्विटी शेयरों के लिए लिस्टिंग की मंजूरी मिली थी। इससे पहले, Saraf Housing Development Private Limited को ₹100 प्रति शेयर के हिसाब से 2,50,000 शेयर जारी करने की मंजूरी दी गई थी। मार्च 2025 तक, प्रमोटर ग्रुप की कंपनी में कुल हिस्सेदारी लगभग 70.16% थी, जिसमें Saraf Housing Development Private Limited की हिस्सेदारी करीब 9.78% थी। इन कदमों के बावजूद, कंपनी ने हालिया तिमाही में घाटा और शेयर पर नेगेटिव बुक वैल्यू दर्ज की है।
आगे क्या उम्मीद करें?
- प्रमोटर की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी: इस इश्यू के बाद प्रमोटर ग्रुप की कुल शेयरहोल्डिंग बढ़ने की उम्मीद है।
- कैपिटल का प्रवाह: इश्यू से जुटाए गए पैसे कंपनी की परिचालन जरूरतों या भविष्य की विस्तार योजनाओं में इस्तेमाल हो सकते हैं।
- संभावित डाइल्यूशन: अगर इश्यू की कीमत मौजूदा बाजार मूल्यांकन से काफी कम रहती है, तो पब्लिक शेयरहोल्डर्स का हिस्सा कम हो सकता है।
- शेयरहोल्डिंग पैटर्न में बदलाव: शेयर अलॉट होने के बाद कंपनी की मालिकाना संरचना बदलेगी।
जोखिम जिन पर नजर रखनी चाहिए
- वित्तीय प्रदर्शन: कंपनी का घाटे का इतिहास और शेयर पर नेगेटिव बुक वैल्यू यह सवाल खड़ा करता है कि नया कैपिटल कितनी प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाएगा।
- मूल्यांकन और कीमत: रजिस्टर्ड वैल्युअर द्वारा तय की जाने वाली फाइनल इश्यू प्राइस बहुत महत्वपूर्ण है। अगर यह काफी डिस्काउंट पर होती है, तो माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स चिंतित हो सकते हैं।
- बाजार की अस्थिरता: पिछले कुछ समय में शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिस पर BSE ने स्पष्टीकरण भी मांगा था।
- प्रमोटर्स की बिकवाली: रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रमोटर्स खुले बाजार में शेयर बेच रहे हैं, जो बाजार की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
प्रतिस्पर्धियों से तुलना
नेशनल ऑक्सीजन इंडस्ट्रियल गैस सेक्टर में Linde India Ltd. और Ellenbarrie Industrial Gases Ltd. जैसी बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करती है। Linde India का मार्केट कैप लगभग ₹59,797 करोड़ है और PE रेशियो 131.5 है। Ellenbarrie Industrial Gases का मार्केट कैप करीब ₹2,864 करोड़ है और PE 34.4 है। इसके विपरीत, नेशनल ऑक्सीजन का मार्केट कैप बहुत छोटा, करीब ₹33 करोड़ है, PE 32.29 है, और यह अपने नेगेटिव बुक वैल्यू और हालिया तिमाही के घाटे जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। यह इसकी इंडस्ट्री में अलग वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।
लेटेस्ट वित्तीय स्थिति
नेशनल ऑक्सीजन लिमिटेड ने दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही के लिए ₹1.55 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है।
आगे क्या देखना महत्वपूर्ण होगा?
- रजिस्टर्ड वैल्युअर द्वारा तय की जाने वाली अंतिम इश्यू प्राइस।
- SEBI और स्टॉक एक्सचेंजों से आवश्यक नियामक मंजूरी मिलना।
- कुल जुटाई गई राशि और कंपनी द्वारा उनके उपयोग की योजना।
- अलॉटमेंट के बाद शेयरहोल्डिंग पैटर्न का अपडेट।
- कंपनी के भविष्य के वित्तीय नतीजे और परिचालन प्रदर्शन।
