NIBE लिमिटेड ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) जिगर शाह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 11 अप्रैल, 2026 के कारोबारी घंटों की समाप्ति से प्रभावी होगा। मिस्टर शाह ने साफ किया है कि यह फैसला पूरी तरह से स्वास्थ्य कारणों से लिया गया है और इसके पीछे कोई अन्य वजह नहीं है।
कंपनी के टॉप फाइनेंस रोल में बार-बार होने वाले ये बदलाव चिंता का विषय हैं। चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) किसी भी कंपनी की वित्तीय रणनीति, निगरानी और अनुपालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे पद पर लगातार बदलाव से कंपनी की वित्तीय स्थिरता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े हो सकते हैं, जिससे इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस (Investor Confidence) पर भी असर पड़ सकता है।
NIBE लिमिटेड, जिसे पहले कविता फैब्रिक्स लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, ने फरवरी 2020 में नए मैनेजमेंट के आने के बाद टेक्सटाइल से डिफेंस और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) कंपोनेंट्स के कारोबार में कदम रखा था। इस बड़े बदलाव के बाद से कंपनी में एग्जीक्यूटिव स्तर पर काफी फेरबदल देखा गया है। कई CFOs ने तेजी से इस्तीफा दिया है, जिनमें अगस्त 2024 में इस्तीफा देने वाले मिस्टर रवि कुमार पारेख भी शामिल हैं। यह एग्जीक्यूटिव टर्नओवर (Executive Turnover) सिर्फ CFO तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण पदों और यहां तक कि वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditors) में भी देखा गया है।
हालांकि मैनेजमेंट बदलने के बाद कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में कुछ सुधार और मार्जिन में बढ़ोतरी देखी गई थी, लेकिन फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY2026) के हालिया नतीजों ने सबको चौंका दिया। इस तिमाही में कंपनी को ₹17.06 करोड़ का भारी कंसोलिडेटेड नेट लॉस (Consolidated Net Loss) हुआ, जबकि रेवेन्यू में पिछले साल की तुलना में 60% की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। यह प्रदर्शन भारतीय डिफेंस सेक्टर में चल रहे बूम (Boom) के बिलकुल विपरीत है।
अब NIBE लिमिटेड का बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (Board of Directors) नए चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करेगा। कंपनी के लिए यह प्राथमिकता है कि वित्तीय जिम्मेदारियों का एक सहज हस्तांतरण (Smooth Handover) सुनिश्चित किया जाए। इन्वेस्टर नए CFO की नियुक्ति की समय-सीमा और उनकी योग्यता पर बारीकी से नजर रखेंगे। लगातार एग्जीक्यूटिव बदलावों को देखते हुए, निवेशक गवर्नेंस (Governance) को लेकर अधिक सतर्क रवैया अपना सकते हैं।
NIBE लिमिटेड डिफेंस और EV कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में काम करती है। इसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) जैसी स्थापित डिफेंस कंपनियों की तुलना में काफी कम है। भले ही भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री ग्रोथ कर रही है, NIBE की हालिया वित्तीय गिरावट बताती है कि कंपनी अपने बड़े साथियों की तुलना में विशिष्ट चुनौतियों का सामना कर रही है। अब निवेशकों को नए CFO की नियुक्ति, प्रबंधन द्वारा एग्जीक्यूटिव पदों को स्थिर करने और वित्तीय नतीजों को बेहतर बनाने की योजनाओं पर नजर रखनी होगी।
