सरकारी मंजूरी, बड़ा निवेश
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने NHPC के 1720 MW क्षमता वाले कमला हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। अरुणाचल प्रदेश में बनने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए कुल ₹26,069.50 करोड़ का भारी-भरकम निवेश मंजूर किया गया है। एक बार चालू होने के बाद, यह प्रोजेक्ट सालाना 6870 मिलियन यूनिट (MUs) बिजली पैदा करेगा।
ज्वाइंट वेंचर और सरकारी मदद
यह प्रोजेक्ट NHPC और अरुणाचल प्रदेश सरकार के बीच एक ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) के तौर पर विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए वित्तीय मदद भी देगी, जिसमें बाढ़ नियंत्रण के लिए ₹4,743.98 करोड़, इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹1,340 करोड़ और राज्य सरकार की इक्विटी (Equity) के लिए ₹750 करोड़ का सेंट्रल फाइनेंशियल असिस्टेंस (Central Financial Assistance) शामिल है।
ऊर्जा सुरक्षा और विकास को बढ़ावा
यह मंजूरी NHPC के लिए एक बड़ा कदम है, जो कंपनी को अपनी रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) क्षमता का विस्तार करने और अरुणाचल प्रदेश जैसे हाइड्रो पावर की अपार संभावना वाले राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा। इस प्रोजेक्ट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) मजबूत होगी और स्थानीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
NHPC का अनुभव और चुनौतियां
भारत की सबसे बड़ी हाइड्रो पावर प्रोड्यूसर (Hydropower Producer) के तौर पर, NHPC का अरुणाचल प्रदेश में बड़े प्रोजेक्ट्स को संभालने का अच्छा अनुभव है। हालांकि, पिछले कुछ प्रोजेक्ट्स, जैसे सुबनसिरी लोअर एचईपी (Subansiri Lower HEP), में देरी और लागत बढ़ने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। कंपनी राज्य सरकारों के साथ मिलकर बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मैनेज करने का ट्रैक रिकॉर्ड रखती है।
प्रोजेक्ट का असर
इस मंजूरी का सीधा असर NHPC की भविष्य की बिजली उत्पादन क्षमता पर पड़ेगा, जो 1720 MW बढ़ जाएगी। यह बड़ा कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकता है। साथ ही, अरुणाचल प्रदेश में इस प्रोजेक्ट से आर्थिक गतिविधियां और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) तेजी से होगा। प्रोजेक्ट के चालू होने के बाद शेयरधारकों (Shareholders) के लिए एक लंबा रेवेन्यू स्ट्रीम (Revenue Stream) भी तैयार होगा।
संभावित जोखिम
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) की वजह से फैसले लेने और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (Execution) में जटिलताएं आ सकती हैं। केंद्र सरकार पर निर्भर वित्तीय सहायता में देरी या बदलाव का भी खतरा है। 96 महीनों (8 साल) की इस बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की समय-सीमा पर लागत बढ़ने और शेड्यूल में देरी जैसे जोखिम बने रहते हैं, जैसा कि पहले के प्रोजेक्ट्स में देखा गया है।
पावर सेक्टर में तुलना
पावर सेक्टर (Power Sector) में NHPC मुख्य रूप से हाइड्रो पावर पर फोकस करती है। वहीं, NTPC Ltd भारत की सबसे बड़ी पावर प्रोड्यूसर है, जिसके पास थर्मल, हाइड्रो और रिन्यूएबल का एक विविध पोर्टफोलियो है। SJVN Ltd भी हिमालयी हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के विकास में सक्रिय है।
वित्तीय स्थिति और अगले कदम
मार्च 2023 तक, NHPC की कुल इंस्टॉलड कैपेसिटी (Installed Capacity) करीब 7,090 MW थी, जिसमें ज्यादातर हाइड्रो पावर ही शामिल है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी (Debt-to-Equity) रेशियो लगभग 1.25 है, जो नए प्रोजेक्ट्स के लिए एक लीवरेज्ड (Leveraged) लेकिन मैनेजेबल (Manageable) फाइनेंशियल स्ट्रक्चर (Financial Structure) को दर्शाता है। आगे, प्रोजेक्ट के लिए अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट (Joint Venture Agreement) को फाइनल करना, सभी जरूरी एनवायर्नमेंटल (Environmental) और रेगुलेटरी (Regulatory) अप्रूवल लेना, और फिर सिविल वर्क (Civil Work) शुरू करना जैसे कदम उठाए जाएंगे।
