NCLAT का फैसला
नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT), चेन्नई ने Aban Offshore Limited के वन टाइम सेटलमेंट (OTS) प्रस्ताव पर कहा है कि कंपनी द्वारा प्रस्तुत योजना के आधार पर किसी भी तरह के समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है। इस फैसले के बाद, कंपनी का मामला अब कानूनी आधार पर सुना जाएगा, न कि किसी सेटलमेंट के ज़रिये।
CIRP जारी रहेगा
ट्रिब्यूनल के निर्णय के अनुसार, Aban Offshore का कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेसोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) जारी रहेगा। कंपनी के लिए एक नया रेसोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) नियुक्त किया गया है। कंपनी को अपनी अपील फाइलिंग में नए RP को औपचारिक रूप से शामिल करने के लिए संशोधन करना होगा।
यह क्यों अहम है
इस फैसले का मतलब है कि Aban Offshore अपने वित्तीय दायित्वों को एक साधारण वन टाइम सेटलमेंट के जरिए हल नहीं कर पाएगी। कंपनी का भविष्य किसी बातचीत वाले समझौते के बजाय उसके कानूनी तर्कों पर निर्भर करेगा। यह कंपनी, उसके लेनदारों और शेयरधारकों के लिए उसकी अंतिम वित्तीय स्थिति और भविष्य के संचालन को लेकर अनिश्चितता को और बढ़ाता है।
पृष्ठभूमि
Aban Offshore पिछले कई सालों से गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है। कंपनी लगातार घाटे, घटती आय और बड़े कर्ज़ का सामना कर रही है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की डिफ़ॉल्ट याचिका के बाद 1 सितंबर, 2025 को CIRP शुरू किया था। ऑडिटर्स ने भी कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (चलती रहने की क्षमता) पर चिंता जताई थी और इसके बैलेंस शीट में नेट वर्थ नकारात्मक (negative) है। कंपनी ने अगस्त 2022 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के साथ एक इंसॉल्वेंसी केस OTS के ज़रिये सुलझाया था।
आगे क्या होगा
- Aban Offshore के वित्तीय दायित्वों के लिए वन टाइम सेटलमेंट का रास्ता अब बंद हो गया है।
- कंपनी का भविष्य बातचीत से समझौते के बजाय उसकी अपील में कानूनी तर्कों पर निर्भर करेगा।
- नवनियुक्त रेसोल्यूशन प्रोफेशनल के साथ CIRP जारी रहेगा।
- शेयरधारकों को संभावित डाइल्यूशन (dilution) या रेसोल्यूशन प्रोसेस के अंतिम परिणाम के बारे में अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
जोखिम
- कानूनी कार्यवाही में और देरी हो सकती है अगर कंपनी नए RP को शामिल करने के लिए अपनी अपील फाइलिंग में तुरंत संशोधन नहीं करती है।
- कानूनी अपील की अंतर्निहित अनिश्चितता, जिससे बातचीत वाले OTS से कम अनुकूल परिणाम मिल सकते हैं।
- कंपनी की गंभीर वित्तीय डिस्ट्रैस (distress), नकारात्मक नेट वर्थ और ऊँचे कर्ज का स्तर महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।
बाज़ार के अन्य खिलाड़ी
Aban Offshore ऑफशोर ड्रिलिंग सर्विसेज सेक्टर में ONGC, Reliance Industries जैसी बड़ी कंपनियों और Dolphin Offshore Enterprises, Jindal Drilling & Industries जैसी छोटी फर्मों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। हालांकि, Aban की वर्तमान CIRP प्रक्रिया और गंभीर वित्तीय स्थिति के कारण ONGC या HPCL जैसे स्वस्थ साथियों के साथ सीधे प्रदर्शन की तुलना करना मुश्किल है।
आंकड़े
- Q2 FY26 में कंसोलिडेटेड नेट लॉस ₹307.44 करोड़ था।
- Q1 FY26 में कंसोलिडेटेड नेट लॉस बढ़कर ₹2,528.12 करोड़ हो गया था।
- ₹281 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर्स (Non-Convertible Redeemable Preference Shares), जो 2014 में जारी किए गए थे, 2 अप्रैल, 2026 तक अनरिडीम्ड (unredeemed) हैं।