कंपनी की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, डायरेक्टर्स, प्रमोटर्स और उनके करीबी रिश्तेदारों समेत अन्य नामित व्यक्तियों के लिए ट्रेडिंग विंडो 1 अप्रैल, 2026 से बंद कर दी गई है। यह रोक कंपनी के 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष और तिमाही के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों के ऐलान के 48 घंटे बाद तक लागू रहेगी। SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के तहत यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि नतीजों जैसी संवेदनशील जानकारी का फायदा उठाकर अंदरूनी ट्रेडिंग को रोका जा सके।
ट्रेडिंग विंडो बंद करना एक सामान्य प्रक्रिया है जो नियामकों द्वारा अनिवार्य की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य मार्केट की अखंडता (integrity) बनाए रखना और सभी निवेशकों के लिए एक समान अवसर सुनिश्चित करना है। जिन लोगों के पास नतीजों जैसी गैर-सार्वजनिक जानकारी होती है, उन्हें ट्रेडिंग से रोककर, SEBI का लक्ष्य अनुचित लाभ को रोकना और निवेशकों का विश्वास बढ़ाना है।
कंपनी की पृष्ठभूमि और हालिया घटनाक्रम:
साल 1978 में स्थापित, NCC Limited भारत की एक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन कंपनी है। यह बिल्डिंग, ट्रांसपोर्टेशन, जल और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में प्रोजेक्ट्स करती है। हालांकि, हाल ही में 17 फरवरी, 2026 को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने NCC और उसकी सहायक कंपनी OB Infrastructure Limited पर दो साल का डीबारमेंट (प्रतिबंध) आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत, दोनों कंपनियां NHAI के टेंडरों में भाग नहीं ले सकेंगी। NCC Limited ने इस फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देने का इरादा जताया है।
आंकड़े और आगे की राह:
आंकड़ों की बात करें तो, Q3FY26 तक NCC Limited का कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक ₹79,571 करोड़ का था। वहीं, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) के लिए, कंपनी ने ₹22,354.9 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था, जो पिछले साल की तुलना में 6.6% की वृद्धि दर्शाता है। अब निवेशक Q4 FY26 और पूरे FY26 के लिए ऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी देने वाली बोर्ड मीटिंग की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। साथ ही, NHAI के डीबारमेंट आदेश और कंपनी की कानूनी लड़ाई पर भी नजरें रहेंगी।