दमदार नतीजों ने NALCO को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया
कंपनी ने इस फाइनेंशियल ईयर (FY26) में ₹17,843 करोड़ का रिकॉर्ड रेवेन्यू हासिल किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 6.28% का इजाफा दिखाता है। वहीं, कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 9.22% बढ़कर ₹5,816 करोड़ पर पहुंच गया है। यह शानदार नतीजे कंपनी के शानदार फिजिकल आउटपुट, यानी बॉक्साइट, एल्युमिना, मेटल और पावर जनरेशन में रिकॉर्ड परफॉरमेंस का नतीजा हैं।
जहां एल्युमिना की कीमतें थोड़ी गिरकर $370 प्रति टन पर आ गईं, वहीं एल्युमीनियम मेटल की ऊंची कीमतों ($2,700 प्रति टन तक) ने कंपनी के मुनाफे को खूब बढ़ाया। इसके अलावा, कास्टिक सोडा और फर्नेस ऑयल जैसे मुख्य इनपुट्स पर हुई बचत ने भी इस मजबूत परफॉरमेंस में अहम भूमिका निभाई।
भविष्य के लिए बड़ी विस्तार योजनाएं
NALCO, जो भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ माइंस (Ministry of Mines) के तहत एक 'नवरत्न' कंपनी है, अपने उत्पादन को बढ़ाने की बड़ी तैयारी में है। कंपनी अपनी एल्युमिना रिफाइनरी की पांचवीं स्ट्रीम को जून 2026 में शुरू करने वाली है, जिससे FY27 तक 2 लाख टन की अतिरिक्त कैपेसिटी जुड़ जाएगी। इसके साथ ही, 0.5 मिलियन टन की क्षमता वाला एक नया स्मेल्टर प्लांट 2030 के आखिर या 2031 की शुरुआत तक तैयार हो जाएगा।
इन विस्तार योजनाओं को सपोर्ट करने के लिए, उत्कल माइंस से कोयले का उत्पादन FY27 तक बढ़कर 4.8 मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे सप्लाई की सुरक्षा और मजबूत होगी। इसके अलावा, नेयवेली लिग्नाइट (Neyveli Lignite) के साथ 50-50 ज्वाइंट वेंचर में बनने वाला नया पावर प्लांट कंपनी के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) के बोझ को कम करेगा।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, NALCO को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। एल्युमिना की स्पॉट कीमतें फिलहाल ओवरसप्लाई के कारण अपने निचले स्तर ($300-$310 प्रति टन) के करीब हैं। कंपनी को एक्सपोर्ट लॉजिस्टिक्स को प्रभावित करने वाले भू-राजनीतिक मुद्दों से भी निपटना पड़ रहा है। कास्टिक सोडा और फर्नेस ऑयल जैसे इनपुट्स की बढ़ती कीमतें भी कंपनी के मार्जिन्स पर दबाव डाल सकती हैं।
कॉम्पिटिटर्स पर एक नजर
भारत में NALCO के मुख्य कॉम्पिटिटर्स Hindalco Industries और Vedanta Ltd. हैं। FY23 में, Hindalco ने ₹1,971 करोड़ का कंसोलिडेटेड PAT दर्ज किया था, जबकि Vedanta Aluminium ने 2.26 मिलियन टन का उत्पादन किया था।
आगे क्या?
निवेशकों की नजर अब जून 2026 में एल्युमिना रिफाइनरी स्ट्रीम के चालू होने, नए स्मेल्टर प्रोजेक्ट की प्रगति और मेटल की कीमतों पर मैनेजमेंट के विचारों पर रहेगी। कोयले के उत्पादन लक्ष्य, कच्चे माल की लागत के प्रभाव और गैलियम व रेयर अर्थ एलिमेंट्स (rare earth elements) प्रोजेक्ट्स में डेवलपमेंट पर भी पैनी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
