डील की पूरी कहानी: 17 एकड़ से ज्यादा की ज़मीन बिकी
Mukand Limited ने यह डील दिघे और कलवा, ठाणे स्थित अपनी ज़मीन के टुकड़ों के लिए की है। कुल बिक्री मूल्य ₹555.35 करोड़ तय हुआ था। इसमें से ₹445.35 करोड़ का बाकी भुगतान कंपनी को मिल चुका है। इससे पहले ₹110.00 करोड़ का भुगतान एडवांस में मिल चुका था। यह लगभग 17.25 एकड़ यानी 69,823 वर्ग मीटर ज़मीन की बिक्री है।
कंपनी के लिए बड़ा फाइनेंशियल बूस्ट
यह डील Mukand की नॉन-कोर एसेट्स (non-core assets) को भुनाने की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। इससे कंपनी के पास अच्छी खासी नकदी (cash) आएगी। इस पैसे का इस्तेमाल कर्ज़ चुकाने, वर्किंग कैपिटल (working capital) बढ़ाने या भविष्य में निवेश के लिए किया जा सकता है, जिससे कंपनी की बैलेंस शीट (balance sheet) मजबूत होगी। कंपनी ने साफ किया है कि यह बिक्री कंपनी के पूरे कारोबार का हिस्सा नहीं है।
ज़मीन बिक्री का पिछला इतिहास
Mukand Limited अपनी नॉन-कोर ज़मीनों को बेचकर अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने और कर्ज़ कम करने का काम सालों से कर रही है। इसी कड़ी में, मार्च 2021 में कंपनी ने ठाणे की 55 एकड़ लीजहोल्ड ज़मीन ₹801 करोड़ में बेची थी, जिसका मुख्य इस्तेमाल कर्ज़ चुकाने के लिए हुआ था। इससे पहले, जुलाई 2025 में कलवा और दिघे में करीब ₹673 करोड़ की ज़मीन डील हुई थी, जिससे शेयर में 10% से ज़्यादा की तेजी आई थी। ये बिक्री दर्शाती है कि कंपनी अपनी प्रॉपर्टी से वैल्यू निकालने पर ज़ोर दे रही है, जो उसके पुराने वित्तीय संघर्षों (कर्ज़ रीस्ट्रक्चरिंग) को देखते हुए महत्वपूर्ण है।
आगे क्या?
इस बिक्री से कंपनी को ₹555.35 करोड़ की बड़ी नकद राशि मिली है, जो सीधे तौर पर उसकी लिक्विडिटी को बढ़ाएगी। इससे कंपनी को अपने पुराने कर्ज़ के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। Mukand अपने मुख्य कारोबार, यानी स्पेशियलिटी स्टील (specialty steel) और इंडस्ट्रियल मशीनरी (industrial machinery) पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगी, और वर्तमान ऑपरेशन्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
कर्ज़ प्रबंधन पर नज़र
हालांकि, एसेट सेल (asset sale) से लिक्विडिटी तो बढ़ी है, लेकिन Mukand पर पहले से ही काफी कर्ज़ है और उसने पहले कॉर्पोरेट डेट रीस्ट्रक्चरिंग (corporate debt restructuring) भी कराई है। लंबे समय तक वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने कर्ज़ के प्रोफाइल को मैनेज करना अभी भी अहम होगा।
इंडस्ट्री की चाल
नॉन-कोर एसेट्स बेचकर कर्ज़ कम करना और लिक्विडिटी बढ़ाना भारतीय इंडस्ट्रियल कंपनियों के लिए एक आम रणनीति है। उदाहरण के लिए, Tata Steel ने फाइनेंशियल ईयर 16 में ₹4,100 करोड़ से ज़्यादा की एसेट सेल की थी। RINL ने भी वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए 13.89 एकड़ ज़मीन ₹480 करोड़ में बेचने की योजना बनाई थी।
मुख्य आंकड़े
- कुल बिक्री मूल्य: ₹555.35 करोड़ (मार्च 2026 में रिपोर्ट)
- भुगतान की गई शेष राशि: ₹445.35 करोड़ (मार्च 2026 में रिपोर्ट)
- पिछला आंशिक भुगतान: ₹110.00 करोड़
- बेची गई कुल ज़मीन: लगभग 17.25 एकड़ (69,823 वर्ग मीटर)
भविष्य की राह
निवेशक अब कलवा ज़मीन की सबडिवीजन आर्डर (subdivision order) की फाइनल होने का इंतज़ार करेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Mukand इस पैसे का इस्तेमाल कैसे करती है, खासकर कर्ज़ चुकाने और अपने मुख्य व्यवसायों में दोबारा निवेश करने के संबंध में। आगे चलकर एसेट मोनेटाइजेशन (asset monetization) या कैपिटल एलोकेशन (capital allocation) योजनाओं पर भी नज़र रहेगी।
