Menon Bearings ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए अपने अब तक के सबसे दमदार नतीजे पेश किए हैं।
पूरे साल की बात करें तो कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹299.46 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 23.5% ज्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट में 53.4% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह ₹38.25 करोड़ पर जा पहुंचा। पूरे साल का EBITDA ₹64.42 करोड़ दर्ज किया गया।
चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे भी शानदार रहे। इस तिमाही में रेवेन्यू 34.7% बढ़कर ₹87.79 करोड़ हो गया, जबकि नेट प्रॉफिट 108.7% की छलांग लगाकर ₹13.78 करोड़ पर पहुंच गया।
इस शानदार प्रदर्शन के पीछे कंपनी की अपनी कैपेसिटी एक्सपेंशन (Capacity Expansion) की रणनीतियां काम आईं। Bi-Metal और Brakes डिवीजनों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और Alkop डिवीजन में किए गए बड़े निवेश का नतीजा है कि कंपनी मांग को पूरा कर पाई।
सबसे खास बात यह है कि Menon Bearings ने अब इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में भी कदम रख दिया है। अपने Alkop डिवीजन के जरिए कंपनी इस तेजी से बढ़ते सेक्टर में उतर गई है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कंपनी ऑटो एंसिलरी सेक्टर (Auto Ancillary Sector) में इंजन बेयरिंग, बुशिंग और थ्रस्ट बेयरिंग बनाने के लिए जानी जाती है। पिछले दो सालों से कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने और नए बिजनेस सोर्स खोजने पर जोर दे रही है।
इसके अलावा, कंपनी सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) पर भी ध्यान दे रही है। सोलर पावर और एनर्जी-एफिशिएंट मोटर्स जैसे निवेश से ऑपरेशनल कॉस्ट कम करने और पर्यावरण पर पॉजिटिव असर डालने की कोशिशें जारी हैं।
भविष्य की बात करें तो, कंपनी का लक्ष्य Bi-Metal और Brakes डिवीजनों की बढ़ी हुई क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना है। EV सेगमेंट से अगले फाइनेंशियल ईयर (FY27) तक Alkop रेवेन्यू का 8-10% हिस्सा आने की उम्मीद है। साथ ही, कंपनी भारतीय रेलवे के लिए ब्रेक सेगमेंट में प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन कराने और एक्सपोर्ट मार्केट (FY27 तक 37% का लक्ष्य) का विस्तार करने पर भी ध्यान दे रही है, जिसमें अफ्रीका जैसे नए बाजारों में एंट्री की भी योजना है।
हालांकि, ऑटो इंडस्ट्री की साइक्लिकल नेचर (Cyclical Nature) और EV सप्लाई चेन में एंट्री की चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।