क्यों लगाई गई ट्रेडिंग पर रोक?
SEBI के नियमों के तहत, यह इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) को रोकने के लिए एक स्टैंडर्ड प्रक्रिया है। इस दौरान कंपनी के महत्वपूर्ण कर्मचारी, अधिकारी, डायरेक्टर और उनके करीबी रिश्तेदार कंपनी के शेयर खरीद या बेच नहीं पाएंगे। यह विंडो कंपनी के फाइनेंशियल रिजल्ट्स के सार्वजनिक होने के 48 घंटे बाद ही दोबारा खुलेगी।
कंपनी की बिगड़ती हालत और प्रमोटर की विदाई
इस कदम के पीछे कंपनी की हालिया वित्तीय स्थिति और प्रमोटर (Promoter) द्वारा अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने का मामला भी है। 16 मार्च 2026 को प्रमोटर राजेंद्र कुमार पोद्दार (Rajendra Kumar Poddar) ने कंपनी में अपनी 11.33% हिस्सेदारी बेच दी थी।
रेवेन्यू में भारी गिरावट और ऑडिटर की चिंता
हाल के वर्षों में कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) बुरी तरह गिरा है। FY23 में इसमें 57.0% की गिरावट आई थी, जबकि FY24 में यह 93.9% तक लुढ़क गया। इसके अलावा, 2025 के अंत में फाइलिंग में ऑडिटर (Auditor) ने भी कंपनी की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताई थी। इसमें 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) यानी कंपनी के जारी रहने की क्षमता पर सवाल और लगभग ₹3.20 करोड़ का लोन डिफॉल्ट (Loan Default) शामिल था।
इंडस्ट्री में छोटी है कंपनी
Mayur Leather Products, Bata India Ltd, Liberty Shoes Ltd, Relaxo Footwears Ltd, और Khadim India Ltd जैसी कंपनियों वाले सेक्टर में काम करती है, लेकिन इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalisation) इन बड़ी कंपनियों से काफी कम है।
आगे क्या उम्मीद करें?
अब निवेशकों की नजर कंपनी की ओर से बोर्ड मीटिंग (Board Meeting) की तारीख की घोषणा और उसके बाद आने वाले FY26 के नतीजों पर रहेगी, जो कंपनी की वित्तीय स्थिरता का बड़ा संकेत देंगे।
