Mangalam Global Enterprise Ltd ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने स्टैंडअलोन आधार पर ₹41.37 करोड़ (यानी ₹4137.21 लाख) का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। कंसॉलिडेटेड (Consolidated) आधार पर, इसी अवधि के लिए नेट प्रॉफिट ₹21.75 करोड़ (यानी ₹2174.93 लाख) रहा।
FY26 की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों में, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹11.16 करोड़ (यानी ₹1116.08 लाख) रहा, जबकि कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹6.61 करोड़ (यानी ₹660.57 लाख) दर्ज किया गया।
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 18 अप्रैल, 2026 को हुई बैठक में शेयरधारकों के लिए ₹0.01 प्रति इक्विटी शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है। यह शेयर के फेस वैल्यू का 1% है और कुल मिलाकर लगभग ₹0.33 करोड़ होगा, जो शेयरधारकों की मंजूरी के बाद ही दिया जाएगा।
M/s. Bhupendra J. Shah & Associates को FY 2026-27 के लिए इंटरनल ऑडिटर (Internal Auditor) और M/s. V. M. Patel & Associates को कॉस्ट ऑडिटर (Cost Auditor) नियुक्त किया गया है। स्टेटुटरी ऑडिटर (Statutory Auditor) ने वित्तीय नतीजों पर एक अनमॉडिफाइड ओपिनियन (Unmodified Opinion) दिया है।
FY26 में स्टैंडअलोन प्रॉफिट में आया यह उछाल Mangalam Global Enterprise के लिए एक बड़ा सुधार है। हालांकि, SEBI (Securities and Exchange Board of India) की ओर से एक फोरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) से जुड़े मामले में आए शो कॉज नोटिस (Show Cause Notice) से निवेशकों में चिंता बनी हुई है। यह मामला, साथ ही एक पेंडिंग सेटलमेंट एप्लीकेशन (Settlement Application), स्टॉक के लिए एक महत्वपूर्ण कंसर्न बना हुआ है।
Mangalam Global Enterprise, जो स्टील प्रोडक्ट्स और सीमेंट के मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग में लगी है, को फरवरी 2025 में SEBI से शो कॉज नोटिस मिला था। यह कथित तौर पर वित्तीय स्टेटमेंट में हेरफेर की जांच से जुड़ा था। कंपनी ने मार्च 2025 में SEBI के पास एक सेटलमेंट एप्लीकेशन भी सबमिट की थी।
इंडस्ट्री में, Sarda Energy & Minerals Ltd और Skipper Limited जैसी कंपनियाँ भी इसी तरह के सेक्टर्स में सक्रिय हैं। Mangalam Global का डाइवर्सिफाइड बिज़नेस मॉडल इसे कुछ अलग पहचान देता है।
आगे, निवेशक AGM में फाइनल डिविडेंड पर होने वाली वोटिंग पर नजर रखेंगे। SEBI के शो कॉज नोटिस और सेटलमेंट एप्लीकेशन के नतीजे काफी अहम होंगे, क्योंकि इनका रेगुलेटरी असर दिख सकता है। कंपनी के ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर भी नजर बनी रहेगी।
