FY26 में दमदार प्रदर्शन
M&B Engineering Ltd ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए अपने नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 27.94% की जोरदार बढ़त के साथ ₹1,275.39 करोड़ दर्ज किया गया। पूरे साल का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 20.23% की उछाल के साथ ₹92.64 करोड़ पर पहुंच गया।
Q4 के नतीजों पर एक नजर
हालांकि, 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे मिले-जुले रहे। इस तिमाही में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 16.77% बढ़कर ₹369.00 करोड़ रहा, लेकिन कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 5.31% गिरकर ₹27.00 करोड़ पर आ गया। यह गिरावट टॉप-लाइन ग्रोथ के बावजूद मार्जिन पर दबाव की ओर इशारा करती है।
IPO का असर, मजबूत हुई बैलेंस शीट
मार्च 2024 में आए इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के बाद कंपनी की वित्तीय सेहत में काफी सुधार देखने को मिला है। IPO से मिले करीब ₹164 करोड़ का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया गया। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की नेट वर्थ ₹306.54 करोड़ से दोगुनी से भी अधिक बढ़कर ₹657.10 करोड़ हो गई है। डेट (कर्ज) के स्तर में भी 40.16% की भारी कमी आई है, जिससे कंपनी की वित्तीय लीवरेज बेहतर हुई है।
शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर
पूरे साल में प्रॉफिट में आई यह जोरदार ग्रोथ शेयरधारकों के लिए फायदेमंद साबित होगी। कंपनी की वित्तीय स्थिति ₹1,083 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक से और भी बेहतर होती है, जो आने वाले समय में अच्छी रेवेन्यू विजिबिलिटी प्रदान करती है। बोर्ड ने 10% (₹1 प्रति शेयर) का फाइनल डिविडेंड (लाभांश) देने की सिफारिश की है, जो शेयरधारकों को रिटर्न का संकेत है।
खर्चों पर नजर रखने की जरूरत
निवेशकों को संभावित मार्जिन दबाव पर नजर रखनी होगी। कंसोलिडेटेड कुल खर्च FY25 में ₹894.65 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹1,150.67 करोड़ हो गया। लागत में लगातार वृद्धि, जैसा कि Q4 नेट प्रॉफिट में गिरावट से संकेत मिलता है, लाभप्रदता (profitability) को प्रभावित कर सकती है।
इंडस्ट्री और आगे की राह
M&B Engineering प्रतिस्पर्धी EPC और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सेक्टर में काम करती है, जहाँ इसका मुकाबला PSP Projects Ltd, NCC Ltd, Dilip Buildcon Ltd और HG Infra Engineering Ltd जैसी कंपनियों से है। निवेशक मैनेजमेंट से Q4 में प्रॉफिट में आई गिरावट के कारणों और मार्जिन दबाव को मैनेज करने की रणनीतियों पर खास नजर रखेंगे।
