शानदार नतीजों के पीछे की कहानी
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ₹33 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने का प्रस्ताव रखा है, जो कि पिछले साल के ₹25.30 की तुलना में काफी ज्यादा है। यह डिविडेंड कंपनी के मजबूत फाइनेंशियल परफॉरमेंस और भविष्य के प्रति मैनेजमेंट के बढ़े हुए आत्मविश्वास को दर्शाता है।
FY26 में, M&M ने ₹1,98,638.55 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू और ₹17,098.85 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया। इसकी तुलना में, पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में कंपनी का रेवेन्यू लगभग ₹2.11 लाख करोड़ और प्रॉफिट करीब ₹15,191 करोड़ था।
निवेशकों के लिए एक और अहम खबर यह है कि कंपनी में कुछ लीडरशिप में बदलाव को भी मंजूरी दी गई है। मिस्टर विमल अग्रवाल 1 जुलाई, 2026 से ग्रुप चीफ इंटरनल ऑडिटर का पद संभालेंगे। साथ ही, कंपनी की 80वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 30 जुलाई, 2026 को होगी।
हालांकि, M&M ने 'एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन (एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स) रूल्स, 2025' के संभावित असर को लेकर एक चेतावनी भी जारी की है। इन नियमों के लागू होने की डिटेल्स अभी भी विकसित हो रही हैं, और इनके कंपनी के फाइनेंशियल्स पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है। कंपनी का मानना है कि इन नियमों के पूरे प्रभाव का अभी विश्वसनीय अनुमान लगाना मुश्किल है।
कंपनी का मुख्य फोकस अपने ऑटोमोटिव और फार्म इक्विपमेंट बिजनेस को मजबूत करने पर रहा है। यह Tata Motors, Ashok Leyland, और Maruti Suzuki जैसी प्रमुख ऑटो कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करती है।
FY26 के अंत में, M&M पर स्टैंडअलोन बेसिस पर ₹1,056.09 करोड़ का लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग (कर्ज) था।
